Wednesday, 19 January 2022

हेलो दोस्तों तो कैसे हैं, आप लोग। हमारे आर्टिकल पर आपका स्वागत है। अगर आप एक डाटा एंट्री ऑपरेटर है, या फिर डाटा एंट्री ऑपरेटर बनना चाहते हैं, तो आप यह आर्टिकल आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित होने वाला है। अगर आप एक स्टूडेंट हैं, तो फिर आपने डाटा एंट्री ऑपरेटर (data entry operator) के बारे में जरूर सुना होगा। क्योंकि इस टेक्नोलॉजी के समय में offline हो या फिर online दोनों जगह पर डाटा एंट्री (Data Entry) का कार्य किया जाता है। लेकिन फिर भी बहुत सारे लोगों को यह पता नहीं होता है, कि डाटा एंट्री क्या होती है। और डाटा एंट्री ऑपरेटर कैसे बनते हैं। 
अगर आपको भी डाटा एंट्री के बारे में पता नहीं है, और आप डाटा एंट्री के बारे में जानना जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो हम आपको इस आर्टिकल में डाटा एंट्री क्या है, और डाटा एंट्री ऑपरेटर कैसे बने, की जानकारी देने वाले हैं। तो चलिए बिना देर किए शुरू करते हैं।

डाटा एंट्री क्या है। (what is data entry in hindi)-

जिस तरह से किसी टाइपिस्ट का काम कंप्यूटर में डाटा टाइप करना होता है, उसी प्रकार कंप्यूटर प्रोग्राम में text, number, image, file, document के रूप में विभिन्न प्रकार के डाटा को टाइप करना डाटा एंट्री कहलाता है। तथा जो लोग कंप्यूटर पर डाटा इनपुट या data entry करने का कार्य करते हैं, उन्हें Data Entry Operator कहा जाता है। कंप्यूटर में डाटा एंट्री करने के लिए वह कीबोर्ड, स्कैनर, बारकोड रीडर, ओएमआर स्कैनर, आदि का उपयोग करते हैं। तथा इसके अलावा कुछ डाटा को देखकर या ट्रांसलेट करके भी टाइप किया जाता है। डाटा एंट्री करने के लिए आपको कंप्यूटर में दिए गए डाटा को टाइप करना होता है, उसे एक जानकारी के तौर पर कंप्यूटर में स्टोर या सेव करना होता है।
डाटा एंट्री करने और डाटा एंट्री ऑपरेटर बनने के लिए आपको किसी विशेष डिग्री या योग्यता की आवश्यकता नहीं होती है। अगर आपको कंप्यूटर की अच्छी जानकारी है, तो भी आप कंप्यूटर में डाटा एंट्री कर सकते हैं।

कंप्यूटर में डाटा एंट्री कैसे करे?


कंप्यूटर की लैंग्वेज में हर उस डाटा को एंट्री कहा जाता है, जो आप कीबोर्ड की सहायता से टाइप करते हैं। जैसे अगर कीबोर्ड पर आपके द्वारा कुछ शब्द टाइप किए जाते हैं, तो उसे डांटा कहते हैं इसी तरह अगर कोई iamge, video कंप्यूटर पर अपलोड करते हैं, तो उसे भी डाटा कहते हैं। इस डाटा को कंप्यूटर में Enter या Save करने पर इसे Data Entry कहा जाता है। आप कंप्यूटर पर दो तरह से डाटा एंट्री कर सकते हैं। Online और Offline
Online Data Entry - online data entry मैं आप घर बैठे वर्क कर सकते हैं। कुछ fiber, freelancer तथा ऐसी बहुत सारी वेबसाइट होती है, जहां पर आपको डाटा एंट्री का काम मिल जाता है। आपको यहां पर अकाउंट बनाना होता है, और यह बताना होता है, आप किस तरह का डाटा एंट्री का काम करते हैं। और जब आपको काम मिल जाता है, तो आपको इस वेबसाइट के द्वारा दिया गया डाटा की online data entry करना होती है। 

Offline Data Entry - offline data entry आप घर बैठे आसानी से कर सकते हैं। इसके लिए डाटा एंट्री सीख कर किसी भी कंपनी में जॉब कर सकते हैं। और अपना काम शुरू कर सकते हैं। फिर कंपनी द्वारा आपको जो Data, File, Document दिया जाता है, उसकी एंट्री आपको कंप्यूटर में करना होती है। इसके अलावा भी बहुत सारे ऑफलाइन काम होते हैं। या किसी कंपनी से जुड़कर ऑफलाइन डाटा एंट्री कर सकते हैं।

Update Data in Data Base - किसी कंपनी के सिस्टम या सर्वर के डेटाबेस में डाटा को अपडेट करने के लिए डाटा एंट्री कार्य की आवश्यकता होती है। इसमें कंपनी द्वारा आपको डाटा एंट्री करने के लिए डेटाबेस अपडेट कार्य को समझा दिया जाता है। जिससे आप आसानी से डाटा एंट्री कर सकते हैं। परंतु इस कार्य को करने के लिए आपको टेक्नोलॉजी से जुड़ी जानकारी होना आवश्यक है।

Paper Document - यह डाटा एंट्री के सबसे सरल कार्यों में से एक होता है। इसके लिए आपको किसी खास जानकारी की आवश्यकता नहीं होती है। आपको केवल पेपर (हार्ड कॉपी) पर लिखी जानकारी या डाटा को कंप्यूटर पर टाइप करना होता है।

डाटा एंट्री ऑपरेटर कैसे बने।


डाटा एंट्री ऑपरेटर बनने के लिए आपको किसी विशेष डिग्री या योग्यता की आवश्यकता नहीं होती है। अगर आप 10वीं या 12वीं पास है, तो भी आप डाटा एंट्री ऑपरेटर बन सकते हैं। इसके लिए आपको कंप्यूटर की बेसिक जानकारी होना चाहिए। तथा ms word, ms excel के बारे में जानकारी या इनका उपयोग कैसे किया जाता है, यह पता होना चाहिए।

(•) कंप्यूटर की जानकारी - अगर आप एक डाटा एंट्री ऑपरेटर (data entry operator) बनना चाहते हैं, तो फिर आपको कंप्यूटर का ज्ञान और इसकी बेसिक जानकारियों के बारे में पता होना बहुत जरूरी है। इसमें आपको टाइपिंग के अलावा ms word, excel का उपयोग कैसे किया जाता है, यह भी पता होना चाहिए। तथा स्कैन करना, मेल कैसे भेजे इसकी भी जानकारी होना चाहिए।

(•) शौक्षिक योग्यता होना -  आपको डाटा एंट्री ऑपरेटर बनने के लिए किसी डिग्री या डिप्लोमा की आवश्यकता नहीं होती है। आप 10वीं या 12वीं पास हो तो भी डाटा एंट्री ऑपरेटर बन सकते हैं। लेकिन इसके कुछ कंपनियों में स्नातक भी अनिवार्य होता है। यह कंपनी पर निर्भर करता है, कि वहां पर डाटा एंट्री ऑपरेटर बनने के लिए किस प्रकार की education qualifications होना जरूरी है। और आप किस डाटा एंट्री ऑपरेटर पद के लिए आवेदन कर रहे हैं।

(•) टाइपिंग स्पीड का बेहतर होना - अगर आप एक डाटा एंट्री ऑपरेटर बनना चाहते हैं, तो फिर आपकी टाइपिंग स्पीड का फास्ट और बेहतर होना बहुत जरूरी है। आपकी हिंदी और इंग्लिश टाइपिंग स्पीड बहुत अच्छी होना चाहिए। क्योंकि ज्यादातर कंपनियां ऐसे डाटा एंट्री ऑपरेटर की तलाश में रहती है, जो उनके कार्य को कम समय में तथा तेजी के साथ पूरा कर सकें।

(•) भाषा की जानकारी होना - डाटा एंट्री ऑपरेटर बनने के लिए आपकी हिंदी और इंग्लिश दोनों लैंग्वेज बेहतर होना चाहिए। हिंदी को सभी आसानी से तथा सही से पढ़ लेते हैं। लेकिन इंग्लिश लैंग्वेज में बहुत सारे लोगों को दिक्कत होती है। कुछ कंपनियां होती है, जो आपकी इंग्लिश कम्युनिकेशन योग्यता को देखती है। आज बहुत सारी कंपनियों में अंग्रेजी भाषा का उपयोग किया जाता है, इसलिए आपकी अंग्रेजी भी अच्छी है तो यह आपके लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकती है। लेकिन दोस्तों ऐसा नहीं है, कि आपकी अंग्रेजी अच्छी हो तभी आप डाटा एंट्री ऑपरेटर बन सकते हैं। अगर आपकी अंग्रेजी अच्छी नहीं है, तो भी आप डाटा एंट्री ऑपरेटर बन सकते हैं।
दोस्तों यह थी, डाटा एंट्री और डाटा एंट्री ऑपरेटर कैसे बनें इसके बारे में जानकारी। हमें उम्मीद है, आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसंद आई होगी।

Conclusion -

हमने आपको Data Entry किसे कहते है। और यह क्या है। इसके उपयोग के बारे में आपको पूरी जानकारी दी है। और डाटा एंट्री ऑपरेटर कैसे बने। इसके बारे में भी पूरी जानकारी दी है। में आशा करता हूं आपकी हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसंद आई होगी।

ओर यदि आपको हमारी पोस्ट डाटा एंट्री क्या है। हिंदी में अच्छी लगी हो, ओर आपको इससे कुछ सीखने का मिला हो तो हमे comments करके आप जरूर बताए। ओर इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ whatsapp group , facebook ओर अन्य social networks site's पर शेयर करे और इस जानकारी को अन्य लोगो तक पहुचाने में हमारी मदद करे।

अभी के लिए बस इतना ही। कल फिर मिलते है, एक ओर नई जानकारी के साथ। हमारी इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। आपका दिन शुभ हो।

Tuesday, 18 January 2022

हैलो दोस्तो तो कैसे है, आप लोग। हमारे blog पर आपका स्वागत है। अगर आप एक कंप्यूटर यूजर है, या फिर कंप्यूटर साइंस के स्टूडेंट है, तो फिर आपने कभी ना कभी तो हार्ड कॉपी और सॉफ्ट कॉपी के बारे में सुना ही होगा। क्योंकि हम कंप्यूटर यूज़ करते समय या किसी डॉक्यूमेंट के अंतर्गत इन शब्दों के बारे में सुनते हैं, या पढ़ते हैं।

जब हम किसी जगह पर या कहीं online shop पर exam फॉर्म भरने या सबमिट करने जाते हैं, तो वह हमसे डॉक्यूमेंट की हार्ड कॉपी और सॉफ्ट कॉपी के रूप में मांगते हैं। अगर हमें हार्ड कॉपी और सॉफ्ट कॉपी के बारे में जानकारी होगी, तो हम वह डाक्यूमेंट्स दे देंगे या जमा कर देंगे। लेकिन अगर हमें hard copy और soft copy दोनों के बारे में पता नहीं होता है, तो हमें परेशानी होती है।
बहुत सारे लोग होते हैं, जो हार्ड कॉपी और सॉफ्ट कॉपी को लेकर कंफ्यूज हो जाते हैं। क्योंकि उन्हें हार्ड कॉपी और सॉफ्ट कॉपी के बारे में जानकारी नहीं होती है। जिसकी वजह से उन्हें परेशानी होती है। दोस्तों अगर आपको भी हार्ड कॉपी और सॉफ्ट कॉपी के बारे में पता नहीं है, तथा हार्ड कॉपी और सॉफ्ट कॉपी में क्या अंतर है, यह जानना चाहते हैं, तो आप हमारे साथ अंत तक बने रहे। हम आपको इस आर्टिकल में हार्ड कॉपी तथा सॉफ्ट कॉपी किसे कहते हैं, यह बताने वाले हैं। इसलिए आप हमारे साथ अंत तक बने रहे। तो चलिए बिना देर किए शुरू करते हैं।

हार्ड कॉपी किसे कहते है (what is hard copy in hindi) -


जब हम कंप्यूटर में सेव किसी फाइल या डॉक्यूमेंट को प्रिंटर के जरिए प्रिंट करके बाहर निकालते हैं, तो उसे हार्ड कॉपी (Hard Copy) कहा जाता है। उदाहरण के लिए यदि आप कंप्यूटर में ms word में कोई file या document बनाते हैं, और फिर उस फाइल को प्रिंटर के द्वारा प्रिंट करके बाहर निकालते हैं, तो इसे हार्ड कॉपी कहा जाता है। Hard Copy एक प्रकार का printed document होता है। जिसे हम अपने हाथो से छू सकते है, और पकड़ सकते है। यह एक file, document, photograph, drawing, resume कुछ भी हो सकता है। Hard Copy को हम ब्लूटूथ, पेनड्राइव, मेल के द्वारा ट्रांसफर नहीं कर सकते हैं।

मतलब कंप्यूटर में मौजूद वह file और document जिन्हे हम प्रिंट करके बाहर निकालते हैं, तथा जिन्हें हम छू सकते हैं, और पकड़ सकते हैं, उन्हें हार्ड कॉपी कहा जाता है।

सॉफ्ट कॉपी किसे कहते है (what is soft copy in hindi) -


जब किसी file या document को कंप्यूटर में create (बनाना) करके सेव किया जाता है, और जिसे कंप्यूटर नेटवर्क के जरिए शेयर किया जाता है। उन्हें सॉफ्ट कॉपी कहा जाता है। उदाहरण के लिए आप कंप्यूटर में कोई file या document बनाते हैं, और उसे किसी के साथ पेनड्राइव, ब्लूटूथ, मेल या कंप्यूटर नेटवर्क के द्वारा शेयर किया जाता हैं, तो उसे सॉफ्ट कॉपी कहा जाता है। सॉफ्ट कॉपी को प्रिंट नहीं किया जा सकता है। और ना ही छू सकते तथा पकड़े है। केवल इसे हम शेयर कर सकते हैं। सॉफ्ट कॉपी जिसे हम शेयर कर सकते हैं, वह कुछ भी हो सकती है। जैसे- photo, document, file आदि।
मतलब वह file और document, image जिसे पेनड्राइव, मेल, ब्लुटूथ, कंप्यूटर के द्वारा शेयर किया जाता है, और जिसे हम हाथ से पकड़ कर छू नहीं सकते हैं, उसे सॉफ्ट कॉपी कहा जाता है।

Soft Copy और Hard Copy में क्या अंतर है?



Soft CopyHard Copy
सॉफ्ट कॉपी को एडिट किया जा सकता है।हार्ड कॉपी को एडिट नहीं किया जा सकता है।
सॉफ्ट कॉपी को हम छू नहीं सकते और ना ही पकड़ सकते है। केवल महसूस कर सकते है।हार्ड कॉपी को छू भी सकते है। और पकड़  भी सकते है।
सॉफ्ट कॉपी को अधिक समय तक कंप्यूटर, पैन ड्राइव, लैपटॉप में सेव करके सुरक्षित रख सकते है।इसके विपरित हार्ड कॉपी को हम ज्यादा दिनों तक सुरक्षित नहीं रख सकते है। 
एक ही सॉफ्ट कॉपी को हम बहुत सारे लोग के साथ शेयर कर सकतें है।एक ही हार्ड कॉपी को बहुत सारे लोगों के साथ शेयर करने के लिए उस हार्ड कॉपी की बहुत सारी प्रतिलिप करवाना पड़ती है।
किसी भी सॉफ्ट कॉपी को चेक करने के लिए हमे कंप्यूटर और लैपटॉप की आवश्यकता होती है।हार्ड कॉपी को हम अपने हाथो से छू कर देख सकते है।
सॉफ्ट कॉपी को एक जगह से दूसरी जगह पर ट्रांसफर करने के लिए पेनड्राइव, कंप्यूटर, मेल, ब्लुटूथ का उपयोग किया जाता है। हार्ड कॉपी को एक जगह से दूसरी जगह पर ट्रांसफर करने के लिए फैक्स, कोरियर की मदद ली जाती है।
सॉफ्ट कॉपी को प्रिंट करके हार्ड कॉपी तैयार की जा सकती है।हार्ड कॉपी को सॉफ्ट कॉपी में तैयार करने के उस हार्ड कॉपी को या उसकी प्रतिलीप को कंप्यूटर में सेव किया जाता है।
सॉफ्ट कॉपी को कंप्यूटर, लैपटॉप, पेनड्राइव में सेव किया जा सकता है।हार्ड कॉपी को कंप्यूटर, लैपटॉप, पेनड्राइव में सेव नहीं किया जा सकता है।
यह थी soft copy और hard copy के बारे में जानकारी। हमे उम्मीद है आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा।

Conclusion -

हमने आपको कंप्यूटर Hard Copy और Soft Copy किसे कहते है। तथा इनमे क्या अंतर है, इसके बारे में आपको पूरी जानकारी दी है। में आशा करता हु की आप लोगो को Hard Copy और Soft Copy किसे कहते है। इसके बारे में अच्छे से समझ आया होगा। 

यदि आपको हमारा आर्टिकल Hard Copy और Soft Copy क्या है। हिंदी में अच्छी लगी हो ओर आपको इससे कुछ सीखने का मिला हो तो हमे comments करके आप जरूर बताए।ओर इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ whatsapp group , facebook ओर अन्य social networks site's पर शेयर करे और इस जानकारी को अन्य लोगो तक पहुचाने में हमारी मदद करे।

अभी के लिए बस इतना ही। मिलते है, अगली पोस्ट में एक और नई जानकारी के साथ। 




Monday, 17 January 2022

हेलो दोस्तों तो, कैसे हैं। आप लोग हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है। दोस्तों अगर आप कंप्यूटर का उपयोग करते हैं, तो फिर आपने कभी ना कभी ms word का उपयोग तो किया ही होगा। आज हर किसी काम को कंप्यूटर में करने के लिए ms word का उपयोग किया जाता है। जैसे- हमें कंप्यूटर पर कोई लेटर टाइप करना हो, रिज्यूम बनाना हो, पेपर बनाना हो, हर काम को करने के लिए ms word का उपयोग किया जाता है। ms word का उपयोग home, office, online shop, company और भी अन्य जगह पर किया जाता है।

दोस्तों ms word एक एप्लीकेशन है। जो हमें कंप्यूटर पर कार्य करने के लिए सुविधा प्रदान करती है। इस एप्लीकेशन की सहायता से हम कंप्यूटर पर अपना कार्य करते हैं। हम कंप्यूटर पर काम करते समय ज्यादातर mouse का उपयोग करते हैं। जिसकी वजह से हमें थोड़ा समय लगता है, और हमारा काम भी धीरे-धीरे होता है। लेकिन अगर यह काम हम शॉर्टकट कीज की सहायता से करते हैं, तो बहुत फास्ट हो जाता है। और हमें माउस का उपयोग भी ज्यादा नहीं करना पड़ता है। दोस्तों ms word में काम को और ज्यादा fast करने के लिए shortcut keys का उपयोग किया जाता है। इन शॉर्टकट कीज का उपयोग करके हम अपने काम को और ज्यादा कर सकते हैं।

आजकल तो कॉन्पिटिटिव एग्जाम जैसे- SSC, NET, PSC, UPSC exam में इन शॉर्टकट कीज के बारे में questions भी पूछे जाते हैं। दोस्तों अगर आप भी ms word का उपयोग करते हैं, और आपको इन shortcut keys के बारे में जानकारी नहीं है, तो कोई बात नहीं। यह आर्टिकल आपके लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद साबित होने वाला है। हम आपको इस आर्टिकल में ms word में मुख्य रूप से उपयोग की जाने वाली शॉर्टकट कीज की जानकारी देने वाले हैं। इसलिए आप हमारे साथ अंत तक बने रहे। तो चलिए अब बिना देर किए शुरू करते हैं। लेकिन इससे पहले हम थोड़ा जान लेते हैं, ms word क्या है।



ms word क्या है। (what is ms word in hindi) -


MS Word का पूरा नाम Microsoft Word है। यह एक एप्लीकेशन प्रोग्राम है, जिसे माइक्रोसॉफ्ट द्वारा बनाया गया है। यह microsoft office package का एक सॉफ्टवेयर है। इसका उपयोग word processing करके डॉक्यूमेंट को बनाने, editing, formating, file open, print, share, letter writing, mail जैसे कार्यों को करने के लिए किया जाता है। इसकी सहायता से हम विभिन्न प्रकार के कार्यों को कर सकते हैं। इसके द्वारा हम letter type कर सकते हैं, resume तैयार कर सकते हैं, mail type कर सकते हैं। इसमें लिखे गए word को डिजाइन कर सकते हैं, इसकी सहायता से word की साइज को घटा-बढ़ा सकते हैं, fornt को change कर सकते हैं, और इसकी सहायता से एक ही डॉक्यूमेंट को बहुत सारे लोगों को एक साथ शेयर भी कर सकते हैं। यह सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला word processing software है। जो हम जगह पर उपयोग किया जाता है। 


माइक्रोसॉफ्ट में उपयोग होने वाली शॉर्टकट कीज -( microsoft word shortcut keys in hindi).


Shortcut keysउपयोग
Ctrl+Apage के सभी contents को सिलेक्ट करने के लिए।
Ctrl+Bसेलेक्ट किए गए text को Bold करने के लिए।
Ctrl+Ccopy करने के लिए।
Ctrl+Dfont सेटिंग बदलने के लिए।
Ctrl+Eकिसी भी text को center/बीच में करने के लिए।
Ctrl+FFind Box ओपन करने के लिए।
Ctrl+Gडायरेक्ट किसी page या line पर पहुंचने के लिए।
Ctrl+Hकिसी भी word को रिप्लेस करने के लिए।
 Ctrl+I सेलेक्ट किए गए text को italic करने के लिए।
Ctrl+Jपैराग्राफ को justify करने के लिए।
Ctrl+Kweb link या Hyperlink insert करने के लिए।
Ctrl+Lसेलेक्ट किए गए text को left side में करने के लिए।
Ctrl+Mindent को बड़ाने के लिए।
Ctrl+Nनया डॉक्यूमेंट बनाने के लिए।
Ctrl+Oकिसी फाइल को ओपन करने के लिए।
Ctrl+Pprint window ओपन करने के लिए।
Ctrl+Qindent को समाप्त करने के लिए।
Ctrl+Rसेलेक्ट किए गए text को Right side में करने के लिए।
Ctrl+Sopen डॉक्यूमेंट को save करने के लिए।
Ctrl+Tहैंगिंग इंडेन्ट (hanging indent) बनाने के लिए।
Ctrl+Uसिलेक्ट text को underline करने के लिए।
Ctrl+Vcopy किए गए text को paste करने के लिए।
Ctrl+W खुले हुए डॉक्युमेंट को बंद करने के लिए।
Ctrl+Xसिलेक्ट किए गए text को cut करने के लिए।
Ctrl+Yकिए गए अंतिम process को दोबारा करने के लिए।
Ctrl+Zअंतिम process Undo करने के लिए।

Ctrl+Shift+Lबुलेट बिंदु (bullet point) बनाने के लिए।
Ctrl+Shift+FFont बदलने के लिए।
Ctrl+Shift+Aसिलेक्ट किए गए text के सभी word को बड़े करने के लिए।
Ctrl+Shift+Dसेलेक्ट text में डबल underline करने के लिए।
Ctrl+Shift+EEnable और Disable revision tracking
Ctrl+Shift+ >font size बढ़ाएं + 1pts
Ctrl+Shift+ <font size घटाएं + 1pts
Ctrl+Shift+ *view और Hide Non Printing characters
Ctrl+ =Subscript
Ctrl+Shift+ +Superscript
Ctrl+]font size बड़ाने के लिए।
Ctrl+[font size घटाने के लिए।
Alt+HHome
Alt+Ninsert
Alt+PPage Layout
Alt+SReferences
Alt+MMailings
Alt+RReview
Alt+WView


Document/दस्तावेज में Move/घूमने के लिए shortcut keys-

Arrow Leftएक word को left करना।
Arrow Rightएक word को right करना।
Ctrl+Arrow+Leftएक वर्ड (one word) को left करना।
Ctrl+Arrow+Rightएक वर्ड (one word) को right करना।
Ctrl+Arrow+UPएक पैराग्राफ को ऊपर करने के लिए।
Ctrl+Arrow+Downएक पैराग्राफ को नीचे करने के लिए।
Shift+Tabएक cell को टेबल में लेफ्ट करने के लिए।
Tabएक cell को टेबल में right करने के लिए।
Arrow+UPएक लाइन को ऊपर करना।
Arrow+Downएक लाइन को नीचे करना।
Endलाइन के अंत में ले जाना।
Homeलाइन के शुरूआत में ले जाना।
Alt+Ctrl+Page UPwindow को ऊपर ले जाना।
Alt+Ctrl+Page Downwindow को अंत में ले जाना।
Page UPpage को ऊपर करना।
Page Downpage को नीचे करना।
Ctrl+Page UPडॉक्यूमेंट के सबसे पहले page में जाना।
Ctrl+Page Downडॉक्यूमेंट के सबसे नीचे page में जाना।
Ctrl+Endडॉक्यूमेंट के अंत में जाना।
Ctrl+Homeडॉक्यूमेंट के शुरूआत में जाना।
Shift+F5डॉक्यूमेंट को बंद करने से पहले अंतिम बिंदु पर ले जाता है।




Editing Text Shortcut key's in hindi - 


BackSapceLeft side के वर्ण को डिलीट करना।
Ctrl+BackspaceLeft side से word को डिलीट करना।
DeleteRight side से वर्ण डिलीट करना।
Ctrl+DeleteRight side से word डिलीट करना।
Ctrl+Cग्राफिक्स क्लिपबोर्ड को copy करना।
Ctrl+Xtext या ग्राफिक्स क्लिपबोर्ड को cut करना।
Ctrl+F3text को स्पाइक में काटना।
Ctrl+Shift+F3स्पाइक को paste करने के लिए।
Alt+Shift+Rडॉक्यूमेंट copy बनाना।
Alt+Ctrl+1Heading 1 स्टाइल लगाने के लिए।
Alt+Ctrl+2Heading 2 स्टाइल लगाने के लिए।
Alt+Ctrl+3Heading 3 स्टाइल लगाने के लिए।
Ctrl+Shift+LList स्टाइल लगाना।
Ctrl+Q:पैराग्राफ फॉर्मेटिंग हटाना।
Shift+Enterलाइन ब्रेक करना।
Ctrl+EnterPage ब्रेक करना।
Ctrl+Shift+Enterएक (one) कॉलम ब्रेक करना।


Other Keyboard Shortcut Key's in hindi -


Ctrl+1Single Space lines.
Ctrl+2Double Space lines.
Ctrl+51.5-line Spacing
Ctrl+Enterinsert a page break
Ctrl+Alt+1selected text को Heading 1.
Ctrl+Alt+2selected text को Heading 2.
Ctrl+Alt+3selected text को Heading 3.
Alt+Ctrl+F2open a new document
Ctrl+F2Display the print preview.
Ctrl+Shift+F12Prints the document.
Alt+Ctrl+Ssplit the window
F1open help
F5Open Find, Replace and Go To Windows in MS Word
F7Selected text spelling और grammar check करने के लिए।
F12Save As.
Shift+F3word starting में capital letter लिखने के लिए।
Shift+F7Runs a Thesaurus check on the selected word.
Shift+F12Save Document
Shift+Alt+Dinsert the current date
Shift+Alt+Tinsert the current time


तो दोस्तो यह थी, ms word में उपयोग होने वाले शॉर्टकट कीज के बारे में जानकारी। इन शॉर्टकट कीज का उपयोग करके आप अपने काम को और ज्यादा फास्ट कर सकते है। मुझे उम्मीद है, आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसंद आई होगी। 


Conclusion -

आज इस पोस्ट में हमने आपको ms word में यूज होने वाली shortchut keys कोन कोन सी है, इसके बारे में आपको पूरी जानकारी दी है। में आशा करता हु की आप लोगो को Microsoft Office Word में उपयोग होने वाली शॉर्टकट कीज के बारे में अच्छे से समझ आया होगा। अगर यदि आपको अभी भी इस पोस्ट को लेकर कुछ डाउट्स है, तो आप हमे नीचे comments करके जरूर बताये।

ओर यदि आपको हमारी पोस्ट shortcut Key's of ms word हिंदी में अच्छी लगी हो, ओर आपको इससे कुछ सीखने का मिला हो तो हमे comments करके जरूर बताए।ओर इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ whatsapp group , facebook ओर अन्य social networks site's पर शेयर करे और इस जानकारी को अन्य लोगो तक पहुचाने में हमारी मदद करे।

अभी के लिए बस इतना ही। हमारी इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। आपका दिन शुभ हो।

Sunday, 16 January 2022

हेलो दोस्तों तो कैसे हैं, आप लोग। हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है। दोस्तों आज इस टेक्नोलॉजी के जमाने में हर कोई इंसान कंप्यूटर का उपयोग तो करता ही है। हर किसी इंसान को कंप्यूटर के बारे में जानकारी होती है, हम कंप्यूटर में कुछ भी टाइपिंग करने के लिए कीबोर्ड का उपयोग करते है। दोस्तों क्या हो अगर आप जो बोले और वह आपके कंप्यूटर और लैपटॉप पर खुद ब खुद ही टाइप हो जाए। ना तो आपको कीबोर्ड पर उंगलियों से टाइप करने की जरूरत होगी और ना ही टाइपिंग सीखने की। जिस तरह से एक एंड्राइड मोबाइल फोन बोलने पर टाइप करता है, उसी तरह हमारा कंप्यूटर और लैपटॉप भी बोलने पर टाइपिंग स्टार्ट कर देता है। यह कुछ भी टाइप करने का एक आसान तरीका होता है। 

अगर आपको भी कंप्यूटर में voice typing करना नहीं आता है, तो कोई बात नहीं। हम आपको इस आर्टिकल में कंप्यूटर और लैपटॉप में वॉइस टाइपिंग कैसे की जाती है, इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं। इसलिए आप हमारे साथ अंत तक बने रहें। तो चलिए अब बिना देर किए शुरू करते हैं।

Voice typing क्या है ? 

voice typing एक converter होता है। जिसमें हम कुछ भी बोलते हैं, तो वह अपने आप ही टाइप हो जाता है। जैसा कि हम सबको पता है, कि सभी स्मार्ट फोन में वॉइस टाइपिंग करना बहुत ही आसान होता है। क्योंकि उनमें ऐसी एप्लीकेशन इंस्टॉल होती है, जिनकी सहायता से आप वॉइस टाइपिंग कर सकते हैं। लेकिन कंप्यूटर और लैपटॉप पर voice typing का कोई सा सॉफ्टवेयर नहीं होता है, इसलिए ज्यादातर लोग परेशान रहते हैं। 

अब यहां पर यह सवाल आता है, कि फिर हम कंप्यूटर में वॉइस टाइपिंग कैसे करें। तो इसके भी कुछ तरीके होते है,  जिसकी सहायता से voice typing की जा सकती है। हम आपको नीचे उन्हीं तरीकों के बारे में बताने वाले हैं।

कंप्यूटर और लैपटॉप पर voice typing कैसे करें।


कंप्यूटर में voice typing के लिए आपको एक headphone की आवश्यकता होती है। हम लैपटॉप में मोबाइल का कोई सा भी headphone उपयोग कर सकते हैं। लेकिन desktop पर 2 स्लॉट दिए जाते हैं। जिसमें से एक पर माइक लगाने का होता है, तथा दूसरे पर headphone लगाए जाता है। आपको यहां पर कोई सा भी ऐसा headphone लेना है, जो माइक और हेडफोन दोनों को सपोर्ट करता है। अब आपको इस हेडफोन को दोनों स्लॉट में से जो headphone वाला स्लॉट होगा उसमे लगाना है। headphone लगाने के बाद आप इसकी सहायता से कंप्यूटर में आसानी वॉइस voice typing कर सकते हैं।

Google Voice Typing -

हम सब जानते हैं, कि हमें इंटरनेट पर कुछ भी सर्च करना होता है, तो हम सबसे पहले गूगल को ही ओपन करेंगे। google पर voice typing करने के लिए सबसे पहले हमें कंप्यूटर में gmail को login करना होगा। उसके बाद ही आप voice typing का उपयोग कर पाओगे।

(•)  गूगल वॉइस टाइपिंग के लिए आप सबसे पहले अपने गूगल सर्च बॉक्स में Google Docs टाइप करें।

(•) इसके बाद आप इसकी वेबसाइट पर जाकर एक नया डॉक्यूमेंट ओपन कर ले।

(•) अब आपको यहां पर ms word जैसा लेआउट दिखाई देगा। इसमें आपको Tools नाम का ऑप्शन दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें।

(•) आपको इस Tools में voice typing का ऑप्शन दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें।
(•) आप इसे सीधे शॉर्टकट कीज (shortcut keys) ctrl+shift+s से भी ओपन कर सकते हैं।

(•) जैसे ही आप इसे शुरु करोगे यह आपके माइक्रोफोन को उपयोग करने की परमिशन मांगेगा। यहां पर आपको Allow कर देना है।

(•) अब आपके सामने एक माइक का निशान आएगा। आपको इस निशान पर क्लिक करना है। इस निशान के ऊपर भाषा लिखी होगी। अब आपको यहां पर वह भाषा सिलेक्ट करना है, जिसमें आप टाइपिंग करना चाहते हैं।

इस तरह से आप google में voice typing कर सकते हैं।

Google Chrome Extension से voice typing करे -


आप Google Chrome Extension को डाउनलोड करके भी voice typing कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपको इस एक्सटेंशन को डाउनलोड करना होगा। इस एक्सटेंशन का नाम voiceln voice typing है। आप इस extension को इंस्टॉल करके अपनी भाषा को सिलेक्ट करें, और इसके बाद अपने headphone को कंप्यूटर से कनेक्ट करें। कंप्यूटर से कनेक्ट करने के बाद आप voice typing कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपको अपने कंप्यूटर में इंटरनेट चालू करना होगा, तभी यह voice typing कर पाएगा।

Speech note की सहायता से -


यह online voice typing करने का एक तरीका है। जिसमें आप बड़ी ही आसानी से voice typing कर सकते हैं। इसके लिए आपको speech note वेबसाइट पर जाना होगा। इस वेबसाइट की सहायता से voice typing करने के लिए हमारे द्वारा नीचे बताई गई स्टेप्स को फॉलो करें।

(•) सबसे पहले आपको वेबसाइट पर जाना है।


(•) इस वेबसाइट को ओपन करने के बाद आपके सामने voice typing का लेआउट मिल जाएगा।

(•) अब आपको यहां पर भाषा का चुनाव करना है। जिस भाषा में आप टाइपिंग करना चाहते वह चुने।

(•) भाषा चुनने के बाद आप voice typing कर सकते हैं।
तो दोस्तों यह है कुछ उपाय जिनकी सहायता से आप कंप्यूटर और लैपटॉप में बड़ी ही आसानी से कर सकते हैं और अपने काम को।

Conclusion -

हमने आपको कंप्यूटर और लैपटॉप में voice typing कैसे की जाती है, इसके बारे में पूरी जानकारी दी है। मुझे उम्मीद है, आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसंद आई होगी। और अगर आपको अभी भी इस पोस्ट में कुछ dout's लगे तो आप हमें कमेंट करके जरूर बताएं। 


और अगर आपको हमारी पोस्ट कंप्यूटर कंप्यूटर में voice typing कैसे करे। हिंदी में अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ WhatsApp group, Facebook और Social Media Site's पर शेयर करें और इस जानकारी को अन्य लोगों तक पहुंचाने में हमारी मदद करें। 


अभी के लिए बस इतना ही, मिलते हैं अगली पोस्ट में। एक और नई जानकारी के साथ। हमारी पोस्ट पढ़ने के लिए धन्यवाद। आपका दिन शुभ हो।

Thursday, 13 January 2022

हेलो दोस्तों तो कैसे है, आप लोग। हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है। दोस्तों आज के इस कंप्यूटर के दौर बहुत ही कम लोग होंगे जिनको कंप्यूटर और कंप्यूटर पार्ट्स के बारे में जानकारी न हो। कंप्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण पार्ट कीबोर्ड होता है, क्योंकि इसी की सहायता से हम कंप्यूटर को इनपुट देते हैं, और कंप्यूटर में उसका आउटपुट प्रदान करता है। इसलिए यह कंप्यूटर का महत्वपूर्ण भाग होता है। दोस्तों हमारे कंप्यूटर कीबोर्ड या मोबाइल के कीबोर्ड का उपयोग हम टाइपिंग के लिए करते हैं। हम टाइपिंग कीज की सहायता से word टाइप करते हैं। 

लेकिन दोस्तों कंप्यूटर कीबोर्ड और मोबाइल कीबोर्ड में टाइपिंग कीज के अलावा कुछ और अन्य विशेष सिंबल या प्रतीक चिन्ह रहते हैं। टाइपिंग करते समय सभी इन चिन्ह या सिंबल का उपयोग करते हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को इन प्रतीक चिन्ह और सिंबॉल्स के नाम पता होते हैं। जब हम किसी से कोई लेटर टाइप करवाते हैं, तो हमें यह बताना होता है, कि यह सिंबल्स या चिन्ह लगा दो, तब हम केवल बोलते हैं, या इशारे से बताते हैं। क्योंकि हमें उस चिन्ह या सिंबल्स या प्रतीक का नाम पता नहीं होता है। दोस्तों कभी कभी तो कॉम्पिटेटिव एग्जाम में भी इन सिंबल्स और चिन्ह के बारे में question पूछे जाते हैं।

दोस्तों अगर आपको भी इन सिंबल्स के बारे में जानकारी नहीं है, आपको इन सिंबल्स के नाम पता नहीं है, और आप इन सिंबल्स के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए आप हमारे साथ अंत तक बने रहे। हम आपको कीबोर्ड में उपयोग होने वाले प्रतीक और सिंबल्स की जानकारी देंगे। तो चलिए अब बिना देर किए शुरू करते हैं। लेकिन उससे पहले जान लेते हैं, सिंबल्स किसे कहते हैं।


Symbol किसे कहते हैं? 

सिंबल्स एक प्रतीक होता है, जो किसी चीज को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है। सिंबल्स का मतलब प्रतीक और चिन्ह होता है। जिसे इंग्लिश में मार्क, साइन, सिग्नल आदि कहते हैं। यह एक इंग्लिश शब्द है, जो ग्रीक भाषा के शब्द सिंबोलो से लिया गया है। सिंबोलो जिसका ग्रीक में अर्थ टोकन होता है।


सभी चीजों के लिए अलग-अलग सिंबल होते हैं जैसे मैथ्स के लिए (+), कॉपीराइट सिंबल ©, स्टार सिंबल * आदि। हम यहां पर आपको उन्हीं सिंबल्स के बारे में तथा उनके क्या नाम है, यह बताने वाले हैं।


Name of symbols / special characters of computer in hindi (कीबोर्ड के सभी सिंबल / स्पेशल कैरेक्टर के नाम हिन्दी में!)



(•)   ~    Tilde - टिल्डे


(•)   `    open Quote - ओपन कोट्स


(•)  *     Asterisk  - एस्टेरिस्क


(•)  $    Dollar      -  डॉलर साइन


(•)  !     Exclamation mark - एक्सक्लेमेशन मार्क


(•)  #   Hash - हैश टैग


(•)  ^    Caret - कैरेट


(•)  @   at symbol - एट सिंबल


(•)  %    percent - परसेंट


(•)  &    and symbol - एण्ड सिंबल


(•)  (     Open Round Brackets - ओपन राउंड ब्रैकेट


(•)  )     Close Round Brackets - क्लोज राउंड ब्रैकेट


(•)  {     Open Curly Bracket - ओपन करली ब्रैकेट


(•)   }    Close Curly Bracket - क्लोज करली ब्रैकेट


(•)   [    Open Bracket - ओपन ब्रैकेट


(•)   ]    Close Bracket - क्लोज ब्रैकेट



(•)   -    Hyphen, minus or dash - हाइफन - माइनस -डेश


(•)   _   Underscore -  अंडरस्कोर


(•)   =   Equal - इक्वल


(•)   +   plus - प्लस


(•)   |    Vartical Bar - वर्टिकल बार


(•)   \   Backslash - बैक स्लैश


(•)    /  Forward Slash - फॉरवर्ड स्लैश


(•)   ;    Semicolon - सैमी कॉलन


(•)   :    colon - कॉलन


(•)   '    Single quote - सिंगल कोट


(•)   "    Double quote - डबल कोट


(•)   ,     Comma - कॉमा


(•)   <    Less than - लेस देन


(•)   >    Greater than - ग्रेटर देन


(•)    .     Full Stop - फुल स्टॉप या डॉट


(•)    ?    Question mark - क्वेश्चन मार्क 


(•)    ÷    Division sign - डिवीजन साइन


(•)    ×    Multification sign - मल्टीफिकेशन साइन


(•)    ∆    Delta - डेल्टा


(•)    £     Pound sign - पाउंड साइन


(•)    €     Euro sign - यूरो साइन


(•)    °     Degree - डिग्री


(•)   ©    Copy Right - कॉपी राइट


(•)   ®    Register sign - रजिस्टर साइन


(•)   ™    Trade Mark - ट्रेड मार्क


(•)   ✓    Check mark - चेक मार्क


(•)   ¢     Cent sign - सेंट साइन


(•)   ¶     Pilcrow sign - पिल्क्रो साइन


(•)   π     (Greek Small Letter) PI - पाई


तो दोस्तो अब तो आपको भी पता चल गया होगा, कीबोर्ड में उपयोग होने वाले सिंबल्स को हिंदी में क्या कहा जाता है, सिंबल्स के हिंदी नाम क्या है। में आशा करता हु आप लोगो को हमारी पोस्ट symbols name in hindi अच्छे से समझ आई होगी। 

Conclusion -

आज इस पोस्ट में हमने आपको Symbols किसे कहते है। ओर इसके उपयोग कहा किया जाता है। और इनके क्या नाम होते है, इसके बारे में आपको पूरी जानकारी दी है। में आशा करता हु की आप लोगो को कीबोर्ड सिंबल्स क्या है। इसके बारे में अच्छे से समझ आया होगा। अगर यदि आपको अभी भी इस पोस्ट को लेकर कुछ डाउट्स है, तो आप हमे नीचे comments करके जरूर बताये।

ओर यदि आपको हमारी पोस्ट keyboard symbols name in hindi.   पोस्ट हिंदी में अच्छी लगी हो, ओर आपको इससे कुछ सीखने का मिला हो तो हमे comments करके जरूर बताए।ओर इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ whatsapp group , facebook ओर अन्य social networks site's पर शेयर करे और इस जानकारी को अन्य लोगो तक पहुचाने में हमारी मदद करे।

अभी के लिए बस इतना ही। हमारी इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। आपका दिन शुभ हो।

Monday, 10 January 2022

हेलो दोस्तो तो कैसे है, आप लोग। हमारे blog पर आपका स्वागत है। दोस्तों जैसा कि हम सबको पता है, कि आज के समय में ऐसा कोई सा भी व्यक्ति नहीं होगा, जो कंप्यूटर के बारे में नहीं जानता होगा। आज के इस टेक्नोलॉजी के समय में हर किसी व्यक्ति के पास कंप्यूटर और लैपटॉप होगा। ऐसे बहुत ही कम लोग होंगे जिनके पास कंप्यूटर या लैपटॉप न हो। आज अगर हम छोटे बच्चे से पूछेंगे कंप्यूटर के बारे में तो वह भी हमें इसके बारे में थोड़ा बहुत कुछ बता ही देगा।

आज 90 फ़ीसदी काम कंप्यूटर के द्वारा होने लगा है। जो लोग कंप्यूटर के बारे में जानते हैं, वह तो इसका उपयोग करते हैं। लेकिन जिन लोगो को कंप्यूटर के बारे में पता नहीं होता, वह भी इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे हैं, और इसको सीखने का प्रयास कर रहे हैं। आज के समय में कंप्यूटर का बहुत बड़ा महत्व हो गया है, बहुत सारे ऐसे काम है, जो कंप्यूटर के बिना अधूरे रह जाते हैं। कंप्यूटर ने आज की इस दुनिया को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। आज हमें किसी की भी जानकारी चाहिए होती है, तो हम कंप्यूटर की सहायता से उसे कुछ ही सेकंड में प्राप्त कर सकते हैं। हम इंटरनेट के माध्यम से कोई सी भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आज के समय में बहुत सारे काम कंप्यूटर के द्वारा ही हो रहे हैं, जो हमें आसान बनाते हैं।

लेकिन दोस्तों इस टेक्नोलॉजी के समय में हमें कंप्यूटर से जितने फायदे हैं, उतने ही इससे होने वाले नुकसान भी हैं। हम आपको आज इस पोस्ट में कंप्यूटर के उन्हीं फायदे और नुकसान के बारे में जानकारी देने वाले है। तो चलिए अब बिना देर किए शुरू करते हैं। लेकिन उससे पहले हम थोड़ा सा कंप्यूटर क्या होता है, यह जान लेते हैं।


कंप्यूटर क्या है। (what is computer in hindi)-

कंप्यूटर एक ऐसी मशीन होती है, जिसे कुछ इस तरह से प्रोग्राम किया जाता है, कि यह हमारे बहुत सारे कार्यों को एक साथ तथा तेज गति से कर सके। यह हमारे द्वारा दिए गए निर्देशों को इनपुट के रूप में लेता है, तथा उनका परिणाम हमें आउटपुट के रूप में प्रदान करता है। कंप्यूटर तकनीक और विज्ञान का सबसे बड़ा आविष्कार है, यह एक छोटी सी पावरफुल मशीन है। जो बहुत सारे लोगों के लिए किसी जादू से कम नहीं है। यह बिना थके और बिना रुके लगातार काम करती रहती है। जिसने लोगों की जिंदगी आसान कर दी है। यह छोटी सी मशीन बड़े-बड़े कार्य कर सकती हैं। इसके कई सारे लाभ है, और कई सारे नुकसान भी है। हम आपको यहां पर कंप्यूटर के उन्हीं फायदे और नुकसान के बारे में बताने वाले हैं।


कंप्यूटर के लाभ (advantages of computer in hindi)-

कंप्यूटर से होने वाले फायदे तो बहुत सारे है। क्यो की यह हर जगह उपयोग होता है। 

(1) आज के समय में कंप्यूटर का उपयोग बहुत जगह पर किया जा रहा है। क्योंकि हम मनुष्यों के मुकाबले तेजी से कार्य कर सकते हैं। जिसके कारण समय की बचत होती है। यह बड़ी से बड़ी गणना को भी कुछ ही सेकंड में हल कर देता हैं।


(2) कंप्यूटर किसी भी कार्य को तेज गति से करने में सक्षम होता है। यह 10 से 15 व्यक्तियों का काम अकेले तथा तेज गति से करता है। इसकी सहायता से हम बड़े से बड़े कार्य को कुछ ही समय में कर लेते हैं।


(3) कंप्यूटर हर जगह उपयोग किया जाता है। यह घर, हॉस्पिटल, ऑफिस, ऑनलाइन शॉप, सब जगह पर उपयोग किया जाता है।


(4) कंप्यूटर में हम बहुत सारे डेटा को स्टोर कर सकते हैं। और जब चाहे उस डेटा को एक्सेस भी कर सकते हैं। हम क्लाउड स्टोरेज का उपयोग करके अपने डाटा को इंटरनेट पर सुरक्षित रख सकते हैं।

(5) आज बहुत सारे कार्य online किए जाते हैं। जैसे- बिजली बिल भरना, मोबाइल रिचार्ज करना, ऑनलाइन शॉपिंग करना, ट्रेन टिकट बुक करना, हवाई जहाज टिकट,  बस टिकट, मूवी टिकट, और भी बहुत सारे काम online किए जा रहे हैं। इसकी सहायता से हम घर बैठें online work भी कर सकते हैं। हम घर बैठे कंप्यूटर के द्वारा किसी को भी payment ट्रांसफर कर सकते हैं।


(6) हम कंप्यूटर के द्वारा घर बैठे इंटरनेट के माध्यम से जानकारियों को प्राप्त कर सकते हैं। और बहुत कुछ सीख सकते हैं।


(7) शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में कंप्यूटर ने दुनिया को बदल कर रख दिया है। हम घर बैठे-बैठे ही बेस्ट टीचर्स से शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। अपनी समस्याओं को उनके साथ साझा करके सुलझा सकते हैं। चिकित्सा क्षेत्र में हम कंप्यूटर के द्वारा इंटरनेट पर सर्च करके दुनिया के बेस्ट डॉक्टर से परामर्श ले सकते हैं, और अपनी प्रॉब्लम बता कर उन्हे ठीक कर सकते है। तथा घर बैठे ही दवाइयों का ऑर्डर कर सकते हैं।

(8) कंप्यूटर में मनोरंजन के क्षेत्र में भी बहुत ज्यादा तरक्की कर ली है। हम कंप्यूटर पर गेम खेल सकते हैं, दोस्तों से चैटिंग कर सकते हैं, अपने दोस्तों से वीडियो कॉल पर बात कर सकते हैं, और सोशल नेटवर्किंग साइट्स से जुड़ सकते हैं। कंप्यूटर में हम मूवी देख सकते हैं, और songs सुन सकते हैं।


(9) कंप्यूटर के द्वारा घर बैठे-बैठे किसी को भी ई-मेल भेज सकते हैं, और उनके द्वारा भेजे गए ई-मेल को रिसीव भी कर सकते हैं।


(10) कंप्यूटर की सहायता से हम डाटा ट्रांसफर कर सकते हैं, और बड़ी से बड़ी फाइल को एक कंप्यूटर में ट्रांसफर कर सकते हैं।


कंप्यूटर से हानि (disadvantages of computer in hindi)-


कंप्यूटर हमारे लिए जितना फायदेमंद है, उतना ही इससे होने वाले नुकसान भी है।

(1) कंप्यूटर का ज्यादा उपयोग करने के कारण हम उसके आदि बन जाते हैं। हम उसके ऊपर ही निर्भर हो जाते हैं। कंप्यूटर के सामने दिन भर बैठे रहने से हमारा बहुत ज्यादा समय बर्बाद हो जाता है।


(2) कंप्यूटर और मोबाइल पर ज्यादा वक्त बिताने के कारण हमारे शरीर को बहुत ज्यादा नुकसान होता है। कंप्यूटर और मोबाइल पर काम करने से हमारी आंखों पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ता है, जिससे हमारी आंखें कमजोर होने लगती है। और एक ही स्थान पर बैठे रहने के कारण हमें कमर दर्द जैसी समस्या उत्पन्न होती है।

(3) कंप्यूटर के कारण बेरोजगारी भी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी है, क्योंकि जहां एक समय बड़ी-बड़ी कंपनियों में मजदूर काम करते थे, आज वहां पर रोबोट के द्वारा काम किया जा रहा है। जिसकी वजह से मजदूर को एक वक्त का खाना मिलना भी मुश्किल हो गया है, और बेरोजगारी जैसी समस्या उत्पन्न हो गई है।


(4) कंप्यूटर के कारण आज सोशल नेटवर्क साइट जैसे फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, आदि पर ही सब बात करना पसंद करते हैं। जिसके कारण परिवारो को मिलना जुलना कम हो गया है। और वीडियो कॉल के द्वारा ही सब आपस में बातचीत कर लेते हैं। जिसकी वजह से किसी को भी परिवार से ज्यादा मिलने की इच्छा नहीं होती है। आज अगर एक घर में चार लोग हैं, तो वह सब भी कंप्यूटर या मोबाइल से चिपके रहते हैं। जिसके कारण परिवार में दूरियां बढ़ती ही जा रही है।


(5) इंटरनेट के इस जमाने में अगर सावधानी से काम ना लिया जाए तो हमारा डाटा भी चोरी होने का खतरा बना रहता है। जिसकी वजह से हमें काफी नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। और तो और कभी किसी अनचाही साइट्स पर विजिट करने से हमारा कंप्यूटर या मोबाइल हैक होने का भी खतरा बना रहता है। इसलिए हमें बहुत सावधानी से कार्य करना पड़ता है।


(6) इंटरनेट के इस दौर में आज बहुत बड़े पैमाने पर ठगी की जा रही है। कई कंपनियां या साइट्स हमे लालच देकर हम से पैसे लेने की कोशिश करती है।


(7) कंप्यूटर के इस दौर में हमें बहुत ज्यादा सावधानियां रखना होती है। अगर हम सावधानियां नहीं रखेंगे, तो हमें इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है।


दोस्तों कंप्यूटर हमारे लिए जितना फायदेमंद होता है, उतना ही वह नुकसानदायक भी होता है। अगर हम इसका सही तरीके से इस्तेमाल करेंगे तो यह हमारे भविष्य के लिए लाभदायक भी है, और अगर इसका सही तरीके से उपयोग ना किया जाए तो यह हमारे और हमारे भविष्य के लिए नुकसानदायक भी है। हमें इसका ज्यादा आदि नहीं होना चाहिए। हम सब जानते हैं, कंप्यूटर एक मशीन है, जो हमारे लिए सही है। लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि यह हर वक्त हमारे लिए सही नहीं हो सकती है। हम कंप्यूटर के कंट्रोल में नहीं है, जबकि कंप्यूटर हमारे कंट्रोल में है। इसलिए हमें इसका सही और सुरक्षित तरीके से उपयोग करना चाहिए।


Conclusion -

आज इस पोस्ट में हमने आपको कंप्यूटर के क्या लाभ हैं, और क्या हानि है। तथा इनका उपयोग कहा और क्यों किया जाता है। इसके उपयोग के बारे में आपको पूरी जानकारी दी है। में आशा करता हु की आप लोगो को कंप्यूटर के advantages और disadvantages किसे कहते है। इसके बारे में अच्छे से समझ आया होगा। अगर यदि आपको अभी भी इस पोस्ट को लेकर कुछ डाउट्स है, या फिर हमारी इस पोस्ट में कुछ सुधार करने की जरूरत है, तो आप हमे नीचे comments करके जरूर बताये।

ओर यदि आपको हमारी पोस्ट कंप्यूटर से होने वाले फायदे और नुकसान क्या है। हिंदी में अच्छी लगी हो ओर आपको इससे कुछ सीखने का मिला हो तो हमे comments करके आप जरूर बताए।ओर इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ whatsapp group , facebook ओर अन्य social networks site's पर शेयर करे और इस जानकारी को अन्य लोगो तक पहुचाने में हमारी मदद करे।

अभी के लिए बस इतना ही। हमारी इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। आपका दिन शुभ हो।

Friday, 7 January 2022

हेलो दोस्तों कैसे हैं, आप लोग। आज के हमारे पोस्ट में आपका स्वागत है। दोस्तों अगर आप जियो फोन Jio Phone का उपयोग करते हैं, और अगर आपको जियो फोन में पासवर्ड लगाना नहीं आता है, और आप जियो फोन में पासवर्ड लगाना चाहते हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं। हम आपको आज बताने वाले हैं, जियो फोन jio phone में पासवर्ड कैसे लगाया जाता है। हम आपको यहां पर कुछ ऐसे आसान से स्टेप बताएंगे, जिसकी सहायता से आप आसानी से जियो फोन (Jio phone) में पासवर्ड लगा सकते हैं। और अपने फोन को सिक्योर या सुरक्षित कर सकते हैं। तो चलिए अब बिना देर किए शुरू करते हैं। लेकिन इससे पहले हम जान लेते हैं, जिओ फोन क्या है। और इसमें कौन-कौन से फीचर्स है।

जियो फोन क्या है(what is jio phone in hindi)-


दोस्तों जैसा कि हम सब जानते हैं, जिओ फोन (jio phone)भारत का कीपैड स्मार्टफोन है। जिसमें यूजर को फोन की कम कीमत के साथ-साथ इसके अंदर बहुत सारे अच्छे फीचर मिल जाते हैं। इसमें हमें सस्ते कॉल के साथ-साथ डाटा भी मिल जाता है। यह 4G सपोर्ट करने वाला कीपैड मोबाइल स्मार्टफोन है। इस मोबाइल में कंपनी की ओर से अच्छे ऑफर दिए जाते हैं। इस फोन में हम what's app, Facebook, youtube आदि का उपयोग भी कर सकते हैं। बहुत सारे लोगों को what's app, facebook, youtube चलाना पसंद होता है। और यह सारे feature हम android phone में उपयोग कर सकते हैं। 
लेकिन एंड्रॉयड फोन थोड़े ज्यादा महंगे होते हैं, जिसके कारण आम लोगों के लिए उन्हें खरीद पाना थोड़ा मुश्किल होता है। इसलिए बहुत सारे यूजर्स इसकी कीपैड वाले स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे हैं। क्योंकि इसमें आपको लगभग वह सभी सोशल मीडिया app या feature मिल जाएंगे, जो एंड्रॉयड फोन में ज्यादा उपयोग किए जाते हैं। जैसे- facebook, what's app, youtube, instagram आदि। और लोग इस कीपैड स्मार्टफोन में इन सोशल मीडिया app को चलाकर बखूबी उपयोग भी कर रहे हैं। जिओ फोन बहुत ही कम समय में काफी ज्यादा लोकप्रिय हो गया है। और आज के समय में ज्यादातर लोगों के पास जिओ फोन देखने को मिल जाएगा।

Jio Phone में पासवर्ड क्यों लगाए?

दोस्तों हमारे फोन में कई सारी ऐसी इंफॉर्मेशन या पर्सनल जानकारी होती है, जो हम किसी के साथ भी शेयर नहीं करना चाहते हैं। हमारे फोन में कई सारे फोटो, वीडियो होते हे, जो हम सब से छुपाना चाहते हैं। ताकि वह किसी गलत व्यक्ति के हाथ में ना जाए, और वह उसका गलत तरीके से फायदा ना उठा सके।

कई बार हमारा फोन गलती से दोस्त या परिजन के हाथ में चला जाता है, जिससे वह मोबाइल में image, video आदि को देखने लगते हैं। ऐसी सिचुएशन में अगर हमारे फोन में पासवर्ड लगा होगा तो कोई बात नहीं, और अगर पासवर्ड नहीं लगा होता है, तो हमारे लिए प्रॉब्लम भी हो सकती है। अगर वह iamge, video, document किसी गलती गलत हाथ में चले जाए, और वह उनका गलत इस्तेमाल करता है, तो हमें बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए इस तरह की समस्या से बचने के लिए फोन में पासवर्ड लगा जाता है। ताकि हमारा डाटा सिक्योर रहें, सुरक्षित रहें।

दोस्तों जहां तक हम स्मार्टफोन की बात करें तो उसमें हमें पैटर्न पासवर्ड, नंबर लॉक पासवर्ड, फिंगरप्रिंट पासवर्ड, और अब तो नए वाले स्मार्टफोन में फेस अनलॉक पासवर्ड की भी देखने को मिल जाते हैं। लेकिन दोस्तों हमें जियो फोन में अन्य स्मार्टफोन की तरह पैटर्न लॉक, फेस लॉक, और फिंगर लॉक लगाने का फीचर तो नहीं मिलता है, लेकिन इसमें हमें 4 अंकों वाला pin password फीचर जरूर मिलता है। जिसकी सहायता से हम अपने फोन में पासवर्ड लगा कर उसे सिक्योर कर सकते हैं, और अपने फोन को दूसरे व्यक्तियों से सुरक्षित कर सकते हैं। दोस्तो अगर आप भी जियो फोन में pin password कैसे लगाया जाता है, यह जानना चाहते हैं, तो आप हमारे साथ आखिरी तक बने रहे। हम आपको यहां पर pin password कैसे लगाया जाता है, इसके आसान से तरीके बताएंगे। जिसका उपयोग करके आप आसानी से जियो फोन में पासवर्ड लगा सकते हैं।

Jio Phone में पासवर्ड कैसे लगाए?


दोस्तों jio phone में पासवर्ड लगाना बहुत ही आसान है। आप हमारे द्वारा बताए गए स्टेप को फॉलो करके आसानी से पासवर्ड लगा सकते हैं। लेकिन दोस्तों अब यहां पर प्रॉब्लम यह होती है, कि कुछ लोगों को इंग्लिश (english) में मोबाइल चलाना पसंद होता है, तो कुछ लोगों को ज्यादा पढ़े लिख नहीं होते हैं, जिन्हें English ज्यादा समझ नहीं आती है, वह हिंदी में मोबाइल को चलाना पसंद करते हैं। इसलिए हम आपको यहां पर hindi और english दोनों में पासवर्ड कैसे लगाएं यह बताने वाले हैं। जिससे english और hindi दोनों यूजर को समझ में आ जाए। जो लोग फोन को में English language का उपयोग करते हैं, वह इन स्टेप को फॉलो करें।
Methed 1-

(•) सबसे पहले आपको अपने जियो फोन (jio phone) के कीपैड लॉक को अनलॉक करना है। इसके लिए आप  🌟 (स्टार) बटन को थोड़ी देर तक दबाए। फोन अनलॉक करने के बाद आपको Home Button यानी बीच वाले बटन को दबाना है।

(•) अब आपको फोन की सेटिंग में जाना है, और यहां पर privacy & security वाले ऑप्शन पर क्लिक करना है।
(•) अब आपको यहां पर screenlock का ऑप्शन दिखाई देगा, इस पर क्लिक करना है।
(•) screen lock पर क्लिक करने के बाद आपको यहां पर दो ऑप्शन दिखेंगे, ON और OFF का। आप यहां पर अपने फोन का पासवर्ड बना रहे हैं, इसलिए ON पर क्लिक करें।

(•) ON पर क्लिक करते ही आपके सामने यहां पर create a password का 4 अंकों वाला box open का होगा। आप यहां पर वह 4 अंक डाल दे, जो आप याद रख सके। और इसके बाद आपको नीचे confirm the password के box में वही 4 अंक डालना है, जो आपने ऊपर डाले थे। 

(•) इसके बाद आपको यहां पर नीचे Right Side में create का ऑप्शन दिखाई देगा इस पर क्लिक कर दें। 

(•) जैसे ही आप create पर क्लिक करोगे, आपके जियो फोन में पासवर्ड लग जाएगा। अब आपका पासवर्ड लॉक काम कर रहा है, या नहीं यह देखने के लिए आपको रेड बटन पर क्लिक करके Home बटन आप पर आना है। और फिर फोन को लॉक लगाने के लिए * 🌟 (स्टार) बटन को कुछ समय के लिए दबाएं। अब आपका फोन लॉक हो जाएगा। अब आपको फोन को अनलॉक करना है, इसके लिए आपको 🌟 बटन को थोड़ी देर तक दबाना है। अब आप से यहां पर 4 अंकों का पासवर्ड डालने को कहा जाएगा, तो आप यहां पर वह 4 अंक डाले जो अपने पासवर्ड बनाते, क्रिएट करते समय डाले थे।जैसे ही आप 4 अंकों वाला पासवर्ड डालेंगे आपका फोन सक्सेसफुली अनलॉक हो जाएगा।
Method 2-


जो लोग मोबाइल को हिंदी में भाषा में उपयोग करते हैं, वह इन स्टेप को फॉलो करें।

(•) सबसे पहले आप अपने फोन की सेटिंग को ओपन करें।

(•) अब आपको यहां पर स्क्रीन लॉक का ऑप्शन दिखाई देगा। इस पर क्लिक करें।

(•) अब आपको यहां पर ऑन और ऑफ दो ऑप्शन दिखाई देंगे, तो आप यहां पर ऑन वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।

(•) अब आपको यहां पर एक पासकोड बनाए लिखा हुआ दिखाई देगा, तो आप यहां पर कोई से भी 4 अंक डाल दे, जो आप याद रख सके। 

(•) अब आपको यहां पर पासकोड की पुष्टि के लिए लिखा हुआ दिखाई देगा, तो आप यहां पर दोबारा वही 4 अंकों डालें, जो आपने ऊपर डाले थे।

(•) अब आपको यहां पर नीचे create लिखा हुआ दिखाई देगा, इस पर क्लिक करें। जैसे ही आप क्लिक करोगे आपको फोन में पासवर्ड लॉक काम करना चालू कर देगा। 
तो दोस्तों इस तरह से आप अपने जियो फोन (jio phone) में पासवर्ड को लगा सकते हैं। और अपनी पर्सनल जानकारियों को सुरक्षित रख सकते हैं। ताकि आपको कभी किसी प्रॉब्लम का सामना ना करना पड़े। दोस्तों मुझे उम्मीद है आपको हमारे द्वारा बताई गई जानकारी पसंद आई होगी।

Conclusion -

दोस्तों आज हमने आपको इस पोस्ट में jio phone में पासवर्ड कैसे लगाया जाता है। इसके बारे में पूरी जानकारी दी है। अगर आपको इस पोस्ट में कुछ dout's लगे तो आप हमें नीचे कमेंट करके जरूर बताएं। 

हमारी पोस्ट jio phone में पासवर्ड कैसे लगाएं हिंदी में अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ WhatsApp group, Facebook our Social Media Sites पर शेयर करें। 

अभी के लिए बस इतना ही मिलते हैं, अगली पोस्ट में और नई जानकारी के साथ। 




Tuesday, 4 January 2022

हेलो दोस्तों तो कैसे हैं, आप लोग। हमारे आर्टिकल में आपका स्वागत है। दोस्तों अगर आप कंप्यूटर साइंस के स्टूडेंट है, या फिर कंप्यूटर से जुड़ी जानकारियां जानने के इच्छुक है, तो आज का हमारा यह आर्टिकल आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित होने वाला है। हम आपको यहां पर टोपोलॉजी से जुड़ी जानकारी शेयर करने वाले हैं।

दोस्तों जैसा कि हम सब जानते हैं, कंप्यूटर नेटवर्क भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं। इनकी सहायता से ही किसी जानकारी को एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस तक पहुंचाया जाता है। और इस पूरे प्रोसेस को नेटवर्क कहा जाता है। क्योंकि इस पूरी प्रोसेस में दो डिवाइस आपस में नेटवर्क की सहायता से एक दूसरे से जुड़ते हैं। और इस नेटवर्क का जो पूरा डिजाइन होता है, जैसे उसे कैसे तैयार किया जाता है, उसके कितने प्रकार होते हैं, इसे टोपोलॉजी कहा जाता है।

दोस्तों अगर आप भी टोपोलॉजी के बारे में अच्छे से जानना चाहते हैं, तो आप हमारे साथ लास्ट तक बने रहे। हम आपको टोपोलॉजी क्या है, इसकी पूरी जानकारी देंगे। तो चलिए अब बिना देर किए शुरू करते है।


टोपोलॉजी क्या है? (what is topology in hindi)-


टोपोलॉजी नेटवर्क की आकृति या लेआउट को कहा जाता है। नेटवर्क का लेआउट टोपोलॉजी होता है। मतलब नेटवर्क के विभिन्न नोड किस तरह हो से आपस में जुड़े रहते हैं, तथा कैसे एक दूसरे की सहायता से कम्युनिकेशन स्थापित करते हैं, यह सब टोपोलॉजी द्वारा ही निर्धारित किया जाता है। अगर हम आसान शब्दों में कहे तो कंप्यूटर को आपस में जोड़ने और उसमें डाटा flow की विधि टोपोलॉजी कहलाती है। यह दो प्रकार की होती है, फिजिक्स और लॉजिकल।


नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है। (what is network topology in hindi)-


जब विभिन्न प्रकार के कंप्यूटर आपस में एक दूसरे से जोड़कर किसी तरह की जानकारी शेयर करते हैं, तो इसे नेटवर्क कहते हैं। तथा इसमें कंप्यूटर जिस तरह से आपस में एक दूसरे से जुड़े रहते हैं, उसे नेटवर्क टोपोलॉजी कहते हैं। एक तरह से नेटवर्क टोपोलॉजी कम्युनिकेशन नेटवर्क के तत्वों जैसे- links, modes, की व्यवस्था है। तथा नेटवर्क टोपोलॉजी का उपयोग विभिन्न प्रकार के टेलीकॉम कम्युनिकेशन नेटवर्क को व्यवस्थित करने में किया जाता है। जिनमें मुख्य रुप से control Radio Networks, Computer Networks, Industrial Field Buses और Command आदि शामिल होते हैं। दोस्तों अब तो आपको पता चल गया है, network topology क्या है। अब हम इसके प्रकार के बारे में जानेंगे।



नेटवर्क टोपोलॉजी के प्रकार (types of network topology in hindi)-

Network topology निम्न प्रकार की होती है। 

(•) रिंग टोपोलॉजी ( ring topology)

(•) बस टोपोलॉजी ( bus topology)

(•) स्टार टोपोलॉजी ( star topology)

(•) ट्री टोपोलॉजी ( tree topology)

(•) मेश टोपोलॉजी ( mesh topology)

(1) रिंग टोपोलॉजी या रिंग नेटवर्क ( ring topology / ring network) -

रिंग टोपोलॉजी मैं सभी कंप्यूटर आपस में एक गोलाकार आकृति या circular structure में जुड़े रहते हैं। यह नेटवर्क आखरी वाले कंप्यूटर से पहले वाले कंप्यूटर को जोड़ता है। इसमें सभी कंप्यूटर आपस में जुड़ने पर ही एक दूसरे पर निर्भर रहते हैं। इस कंप्यूटर में कोई होस्ट (host) या मुख्य कंट्रोलिंग कंप्यूटर (main controling computer) नहीं होता है। अर्थात रिंग टोपोलॉजी में कोई भी कंप्यूटर (owner) स्वामी नहीं होता है। इसलिए इसे सर्कुलर (circular) भी कहते हैं। रिंग नेटवर्क के प्रत्येक डिवाइस में दो NIC (Network Interface Card) लगे रहते हैं। तथा इसमें डाटा का आदान-प्रदान साधारण गति से होता है। मगर इस गति को सही तरीके से चलाने के लिए कंप्यूटर डाटा प्राप्त करने के बाद उसके समीप के अन्य कंप्यूटर को यह निर्धारित चयन करना होता है, कि भेजा गया डाटा उनके लिए है, या नहीं। अगर यह डाटा समीप वाले कंप्यूटर के लिए नहीं है, तो उसे आगे दूसरे कंप्यूटर को pass कर दिया जाता है। इसे इससे डाटा भी circulate होता रहता है।


Advantages of ring topology - 

(•) इसके नेटवर्क की गति बहुत अच्छी होती है।

(•) यह किसी एक कंप्यूटर पर निर्भर नहीं होता है।

(•) रिंग टोपोलॉजी/नेटवर्क को मैनेज करना भी आसान होता है।

(•) इस नेटवर्क में यदि एक लाइन या कंप्यूटर काम करना बंद कर दे तो, फिर दूसरी दिशा की लाइन से काम किया जा सकता है।

(•) इसे इंस्टॉल करने में खर्चा भी कम होता है।


Disadvantages of ring topology -

(•) इसकी गति नेटवर्क में लगे कंप्यूटर पर निर्भर करती है। अर्थात यदि कंप्यूटर कम है, तो इस गति अच्छी होगी, और कंप्यूटर ज्यादा है, तो इसकी गति कम होगी।

(•) इसमें यदि एक कंप्यूटर खराब होता है, तो फिर पूरा नेटवर्क खराब हो जाता है।

(•) इसमें किसी चीज को Add या Remove करना होता है, तो इस नेटवर्क को एक्सेस करने में परेशानी होती है।

(•) इस नेटवर्क पर कार्य करने के लिए अत्यंत जटिल सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है।

(•) इसमें टूबलशूटिंग करना बहुत कठिन होता है।


(2) स्टार टोपोलॉजी (star topology)-

इस नेटवर्क मैं एक Host Computer होता है। जिसे विभिन्न कंप्यूटर से जोड़ दिया जाता है। और उनको नियंत्रित करता है। इसमें सारे कंप्यूटर एक Network या Hub के द्वारा जुड़े रहते हैं। इसको Host कंप्यूटर द्वारा आपस में जोड़ा जाता है। लोकल कंप्यूटर आपस में एक दूसरे से नहीं जुड़े रहते हैं। इस नेटवर्क में Hub में कोई प्रॉब्लम आती है, तो पूरा नेटवर्क खराब हो जाता है। लेकिन अगर लोकल कंप्यूटर खराब हो जाता है, तो बाकी कंप्यूटर सिस्टम पर कोई असर नहीं होता है। तथा स्टार टोपोलॉजी सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती है।


Advantages of Star Topology -

(•) इस नेटवर्क में एक कंप्यूटर से Host कंप्यूटर में लाइन बिछाने में कम लागत लगती है।

(•) यदि इसमें कोई लोकल कंप्यूटर खराब हो जाता है, तो पूरे सिस्टम पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

(•) इसकी सहायता से नेटवर्क को बड़ी आसानी से बड़ा किया जा सकता है।

(•) यह सबसे ज्यादा उपयोग की जाने वाली टोपोलॉजी है।


Disadvantages of Star Topology -

(•) यह टोपोलॉजी इस्तेमाल करने में थोड़ी महंगी होती है।

(•) यह पूरा नेटवर्क Hub या Host कंप्यूटर पर निर्भर होता है। यदि Hub या Host कंप्यूटर खराब हो जाता है, तो पूरा सिस्टम या नेटवर्क फेल हो जाता है।


(3) बस टोपोलॉजी (bus tolopogy)-

इसमें एक ही तार या केबल का उपयोग किया जाता है। और इस तार की सहायता से सभी कंप्यूटर को आपस में जोड़ा जाता है। इस केबल या तार के start point और end point के सिरे में एक विशेष प्रकार का डिवाइस लगा होता है। जिसे टर्मिनेटर (terminator) कहते हैं। इस टर्मिनेटर का कार्य सिग्नल को कंट्रोल करना होता है।


Advantages of Bus Topology -

(•) यह बहुत सस्ती टोपोलॉजी होती है।

(•) इसे इंस्टॉल करना आसान होता है।

(•) इस टोपोलॉजी में कम केबल का उपयोग होता है।

(•) इस टोपोलॉजी में नेटवर्क को create (बनाना) करना आसान होता है।


Disadvantages of Bus Topology - 

(•) यह टोपोलॉजी थोड़ा धीरे काम करती है।

(•) इसमें अगर कोई एक कंप्यूटर खराब हो जाता है, तो सारा नेटवर्क खराब हो जाता है।

(•) इसमें केबल की लंबाई सीमित होती है।

(•) नेटवर्क खराब होने के बाद किसी अन्य कंप्यूटर को जोड़ना थोड़ा कठिन होता है।


(4) ट्री टोलोपॉजी (tree topology) -

Tree Topology का structure मिश्रित structure होता है। Tree Topology एक पेड़ की तरह होता है। इस टोपोलॉजी में star topology और bus tolopogy दोनों के ही लक्षण पाए जाते हैं। इस टोपोलॉजी में स्टार टोपोलॉजी की तरह ही एक होस्ट कंप्यूटर (Host Computer) होता है। तथा बस टोपोलॉजी की तरह सारे कंप्यूटर एक ही केबल से जुड़े रहते हैं। Tree Topology में प्रत्येक segment के लिए point cable बिछाई जाती है। मगर यदि Back Bone Line या केबल लाइन टूट जाती है, तो पूरा ही नेटवर्क रुक जाता है।


Advantages of Tree Topology -

(•) Tree Topology में नेटवर्क को बढ़ाना आसान होता है।

(•) यह कई हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर विक्रेताओं के द्वारा सपोर्ट किया जाता है।

(•) इसमें डिवाइस का point to point connection होता है।


Disadvantages of Tree Topology -

(•) इसके रख रखाव में परेशानी आती है।

(•) इसमें segment की कुल लंबाई उपयोग होने वाले तार के द्वारा सीमित होती है।

(•) इसमें तार बिछाना कठिन होता है।

(•) यह टोपोलॉजी महंगी होती है।

(•) अगर एक कंप्यूटर या नोड खराब हो जाता है, तो सारे चाइल्ड नोड के नेटवर्क भी काम नहीं कर पाते हैं।

(•) Back Bone Line टूट जाने पर पूरा segment रुक जाता है।


(5) मेश टोपोलॉजी (mesh topology)- 

मेश टोपोलॉजी को मेश नेटवर्क भी कहा जाता है। क्योंकि इसमें नेटवर्क का एक जाल बिछा होता है, जिसमें डिवाइस व नेटवर्क नोड्स के बीच में कई inter connections मौजूद होते हैं। जिसकी सहायता से वे आपस में एक दूसरे से जुड़े रहते हैं। अर्थात मेश टोपोलॉजी में प्रत्येक नोड नेटवर्क के अन्य सभी नोड से जुड़े रहते हैं।

मेश टोपोलॉजी में सारे कंप्यूटर कहीं ना कहीं एक दूसरे से जुड़े रहते हैं। और एक दूसरे से जुड़े होने के कारण अपनी सूचनाओं का आदान प्रदान या डाटा ट्रांसफर करना आसान होता है। इसमें कोई Host Computer नहीं होता है।


(6) हाइब्रिड टोपोलॉजी (hybrid topology)-

जब नेटवर्क को बनाने के लिए जब दो या दो से ज्यादा अलग-अलग प्रकार की टोपोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है, तो इसे हाइब्रिड टोपोलॉजी कहते हैं। अगर हम साधारण शब्दों में कहें तो जब एक टोपोलॉजी को दूसरी टोपोलॉजी के साथ जोड़ा जाने के बाद जो टोपोलॉजी बनेगी उसे हाइब्रिड टोपोलॉजी कहते हैं। हाइब्रिड टोपोलॉजी के अनेक फायदे हैं। इसमें अलग-अलग टोपोलॉजी के मिश्रण के कारण बनी यह टोपोलॉजी उनके सभी मूल विशेष लक्षणों को दर्शाती है। लेकिन इस टोपोलॉजी का यह नुकसान भी है, कि यह दूसरे प्रकार के लक्षणों पर आधारित होती है। इसका स्वयं का कोई विशेष लक्षण नहीं होता है।


Advantages of Hybrid Topology - 

(•) इसके नेटवर्क में किसी तरह की कोई खराबी आती है, तो उसके फॉल्ट डिवाइस को खोजना आसान होता है।


Disadvantages of Hybrid Topology -

(•) यह टोपोलॉजी बहुत महंगी होती है। 

(•) इस टोपोलॉजी को इंस्टॉल करना कठिन होता है।


टोपोलॉजी का उद्देश्य ( what is the purpose of topology) -

(•) Computer का एक Arrangement करना और बिना किसी बाधा के network का प्रसार करना ही टोपोलॉजी का काम होता है।

(•) Topology के द्वारा नेटवर्क का लेआउट निर्धारित किया जाता है।

(•) लेआउट निर्धारित करने के बाद कंप्यूटर्स को आपस में जोड़ने के लिए सर्व डाटा फ्लो की विधि अपनाई जाती है। जिसे टोपोलॉजी कहते हैं।

(•) Topology Mathematics में एक Geometric वस्तु के गुणों से संबंधित है, जो निरंतर विकृति के बाद भी संरक्षित रहती है।

तो दोस्तों यह थी, टोपोलॉजी के बारे में जानकारी। हमें उम्मीद है, आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी अच्छी लगी होगी।


Conclusion -

आज इस पोस्ट में हमने आपको Topology किसे कहते है।तथा यह क्या है। इसके उपयोग के बारे में आपको पूरी जानकारी दी है। में आशा करता हु की आप लोगो को Topology किसे कहते है। और इसके क्या फायदे है। इसके बारे में अच्छे से समझ आया होगा। अगर यदि आपको अभी भी इस पोस्ट को लेकर कुछ डाउट्स है, या फिर हमारी इस पोस्ट में कुछ सुधार करने की जरूरत है, तो आप हमे नीचे comments करके जरूर बताये।

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