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Tuesday, 12 October 2021

हेलो दोस्तों तो कैसे हैं, आप लोग। दोस्तों आज के समय में कंप्यूटर का कितना ज्यादा उपयोग किया जा रहा है, यह तो हम सबको पता ही है। आज के इस टेक्नोलॉजी के समय में हर किसी की चाहत होती है, की वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर बने। तो किसी का हैकर बनने का सपना है, तो किसी को कंप्यूटर हार्डवेयर इंजीनियर बनना है। वह यह सब करके अपना करियर बनाना चाहते हैं। जिससे उन्हें पैसे के साथ-साथ नाम भी मिले।

दोस्तों सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर इंजीनियर या हैकर बनने के लिए आपको कोडिंग को knowledge होना बहुत जरूरी है। आज के समय में कोडिंग से संबंधित बहुत सारी लैंग्वेज होती है, जैसे कि C++, Java, C, Python आदि। आपको इन सब लैंग्वेज के बारे में जानकारी होगी, तो आप आसानी से कोडिंग सीख सकते हैं। लेकिन दोस्तों इन सब में से सबसे पहले आपको C langauge आना जरूरी है। क्योंकि अगर अपने C language सीख ली तो आप आसानी से बाकी लैंग्वेज को भी सीख सकते हैं।

दोस्तों अगर आपके मन में भी सवाल है, C Language क्या है, किसी भी लैंग्वेज से पहले C langauge को क्यों सीखें, C language क्यों जरूरी है। तो हम आपको इस आर्टिकल में C language की जानकारी देंगे। इसलिए आप हमारे साथ अंत तक बने रहे। तो चलिए शुरू करते हैं।

C प्रोग्रामिंग लेंग्वेज क्या हैं। (what is c programming language in hindi) -

C एक general purpose high level programming या procedural programming language है। जिसे Dennis Ritchie के द्वारा 1972/1973 में develop किया गया था। इसका उपयोग application और firmware को develop करने के लिए किया जाता है। इसे ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रोग्राम को लिखने के लिए सिस्टम प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के तौर पर डिजाइन किया गया था। इसकी पहली application Unix operating system थी। जिसे दोबारा लिखने के लिए C को डेवलप किया गया था।


C language एक सिंपल लैंग्वेज है। जिसके द्वारा ज्यादातर methematical program लिखे जाते हैं।


C language के मुख्य फीचर में low-level access to memory, simple set of keyword और clean style समाहित है। इन फीचर्स की वजह से ही C language operating system डेवलपमेंट के लिए एक suitable लैंग्वेज है। C के बाद develop की गई लैंग्वेज C language का ही syntax/features का उपयोग करती है। जैसे- java script, PHP, Java आदि। ऐसे बहुत सारे प्रोग्राम हे जो C में compile होते हैं, लेकिन C++ मैं नहीं।

अगर हम आसान शब्दों में कहें तो यह एक कंप्यूटर की भाषा या कोडिंग है, जिसका उपयोग करके कंप्यूटर समझ पाता है, हम उसे क्या कमांड या निर्देश दे रहे हैं।

C Programming Language क्यों सीखें। -

कंप्यूटर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज C बहुत ही ज्यादा पॉपुलर है। इसका इस्तेमाल आज के समय में बहुत सारे सॉफ्टवेयर को बनाने के लिए किया जाता है। यह एक बहुत ही सरल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज मानी जाती है। अगर आपने C लैंग्वेज को सीख लिया है, तो आप बाकी लैंग्वेज को भी आसानी से सीख सकते हैं। C लैंग्वेज को mother language भी कहा जाता है। क्योंकि C के बाद जो भी लैंग्वेज बनाई गई है, उन सब में C language का concept उपयोग किया गया है। इसलिए ज्यादातर C लैंग्वेज सीखने के लिए कहा जाता है।

C प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के फीचर्स -

(•) यह एक procedural language होती है। क्योंकि इसमें predefind instructions की list को step by step follow किया जाता है।


(•) C मैं एक निश्चित संख्या में keywords होते हैं। जिनमें control primitives का सैट if,while, for, switch आदि हैं।


(•) C Program बहुत fast होता है।


(•) C में कई logical और methematical operators होते है।


(•) C मे एक single statement में कई सारे assignments को apply किया जा सकता हैं।


(•) C में functions की return values की हमेशा जरूरत नहीं होती हैं।


(•) C बहुत पुरानी language हैं, लेकिन फिर भी इसका उपयोग बहुत सारी applications में किया जाता है। चाहे वह photo editing software हो या फिर system programing.


(•) C Program बहुत ही portable होते हैं।

Advantage of C language -

(•) C एक सिंपल लैंग्वेज है। जिसका उपयोग हम आसानी से कर सकते हैं। इसमें लिखा गया कोड (Code) बहुत फास्ट होता है।


(•) C लैंग्वेज में हम functions बना सकते हैं। तथा अपने कोड को अच्छे से मैनेज भी कर सकते हैं।


(•) यह एक structured programing language है।


(•) Assembly Language के बाद सबसे फास्ट C लैंग्वेज को ही माना जाता है। इसलिए यह बहुत फास्ट है। तथा इसमें create की गई एप्लीकेशन की प्रोसेसिंग बहुत फास्ट होती है।


(•) यह एक middle level language है। जो high level और low level की एप्लीकेशन बनाने में सक्षम है।


(•) C में C32 reserved  के द्वारा कुछ ऐसी keyword provide की गई है, जिसका उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता है।

Disadvantage of C language - 

(•) C लैंग्वेज object oriented programming को support नहीं करती है।


(•) C लैंग्वेज में run time checking नहीं होती हैं।


(•) C लैंग्वेज में exceptions को run time में handle नहीं किया जा सकता हैं।


(•) C लैंग्वेज किसी भी variable के type को identify करने में सक्षम नहीं होती है।


(•) C लैंग्वेज में re-usability support नही करती हैं।

Professional Language के रूप में C का उपयोग क्यों किया जाता है। -

(•) यह एक बेसिक लैंग्वेज (Basic Language) है। इसे सीखना बहुत ही आसान होता है।


(•) यह बहुत आसानी से low-level-language को हैंडल कर सकती है।


(•) C लैंग्वेज सीखने के बाद हम आसानी से सिस्टम सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर दोनों बना सकते हैं।


(•) इसका उपयोग करके बहुत ही efficient programs लिखा जा सकता है। 


(•) C लैंग्वेज एक हाई लेवल लैंग्वेज है।


(•) C लैंग्वेज को बहुत सारे computer platforms मैं compile किया जा सकता है।


(•) यह लैंग्वेज बहुत ही structured होती है।


(•) C लैंग्वेज सीख लेने पर हमें दूसरी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखने में कोई प्रॉब्लम नहीं होती है।

C लैंग्वेज के version (versions of C language in hindi)-

C langauge को Dennis Ritchie द्वारा develop किया गया था। अब तक C लैंग्वेज के कई सारे version आ चुके हैं। जिन्हें हम नीचे बता रहे हैं।

(•) K & R - यह C लैंग्वेज का original language है। इस version में standard I/O library जैसी function मौजूद थी।


(•) ANSI C AND ISO C -  इस version को ANSI (American National Standards Institute) और ISO (International Organization For Standardization) के द्वारा 1988/1990 में publish किया गया था।


(•) C99 - इसे 1999 में लॉन्च किया गया था। इस version में कुछ नये feature जैसे inline functions, serveral new data types और long int आदि को Add किया गया था।


(•) C11 -  इस version को 2011 में लॉन्च किया गया था। और इसमें library, including type generic macros, anonymous structures जैसे feature को Add किया गया था।


(•) C18 - इसे 2018 में publish किया गया था।

C लैंग्वेज के बारे में रोचक तथ्य - 

(•) आज के समय में C सबसे ज्यादा पॉपुलर और उपयोग किए जाने वाला सिस्टम प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है।


(•) इसे American National Standard Institute के द्वारा 1988 में formalized किया गया।


(•) इसे Unix (UNIX) operating system को लिखने के लिए develop किया गया था।


(•) आज के समय में सबसे पॉपुलर Linux OS और RDBMS MYSQL C में लिखे गए हैं।


(•) ज्यादातर state-of-the-art software को C मैं ही implement किया गया है।


(•) UNIX OS को C मैं ही लिखा गया है।

C का उपयोग कहा-कहा किया जाता है -

C लैंग्वेज का उपयोग बहुत सारी जगह पर किया जाता है। 

Operating system, Language Compilers, Text Editors, Network Drivers, Data Bases, Assemblers, Print Spoilers, Modern Programs, Language Interpreters, Utilities, etc.

तो दोस्तो यह थी C Language के बारे में जानकारी। अब तो आप समझ ही गए होंगे C language किसे कहते है। और इसका use कहा किया जाता है। हम उम्मीद करते है आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसंद आई होगी।

Conclusion -

आज इस पोस्ट में हमने आपको C language किसे कहते है।तथा यह क्या है। इसके उपयोग के बारे में आपको पूरी जानकारी दी है। में आशा करता हु की आप लोगो को C language किसे कहते है। और इसे सीखने के क्या फायदे है। इसके बारे में अच्छे से समझ आया होगा। अगर यदि आपको अभी भी इस पोस्ट को लेकर कुछ डाउट्स है, या फिर हमारी इस पोस्ट में कुछ सुधार करने की जरूरत है, तो आप हमे नीचे comments करके जरूर बताये।

ओर यदि आपको हमारी पोस्ट C language क्या है। हिंदी में अच्छी लगी हो ओर आपको इससे कुछ सीखने का मिला हो तो हमे comments करके आप जरूर बताए। ओर इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ whatsapp group , facebook ओर अन्य social networks site's पर शेयर करे और इस जानकारी को अन्य लोगो तक पहुचाने में हमारी मदद करे।

अभी के लिए बस इतना ही। हमारी इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। आपका दिन शुभ हो।


Saturday, 25 September 2021

हेलो दोस्तों तो कैसे हैं, आप लोग। हमारे आर्टिकल पर आपका स्वागत है। आज हम आपको इस पोस्ट में tally में यूज होने वाले shortcut kyes के बारे में बताने वाले हैं। दोस्तों जैसा कि हम सब जानते हैं, टेली सॉफ्टवेयर accounting मैं सबसे ज्यादा उपयोग होने वाला सॉफ्टवेयर है। बड़ी-बड़ी कंपनी अपने अकाउंट से संबंधित कार्यों को करने के लिए टैली का उपयोग करती है। आज कोई सा भी छोटा अकाउंट से संबंधित काम क्यों ना हो सब जगह पर टैली का उपयोग किया जाता है। हर शॉप वाला अपना अकाउंट से संबंधित कार्य संभालने के लिए टैली का उपयोग करता है।

वैसे तो दोस्तों tally में काम करना तो आसान होता है। लेकिन कभी-कभी काम को और ज्यादा स्पीड या फास्ट करने के लिए टैली में शॉर्टकट कीज का उपयोग किया जाता है। 

दोस्तों अगर आप भी टैली में अपने काम को और ज्यादा फास्ट से करना चाहते हैं, और आप यह जानना चाहते हैं tally के शॉर्टकट कीज के बारे में, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं। आपको यहां पर टैली में यूज होने वाले शॉर्टकट कीज के बारे में पूरी जानकारी देंगे। तो चलिए दोस्तों अब आपका समय खराब ना करते हुए शुरू करते हैं उससे पहले हम जान लेते हैं टेली क्या है।

टैली क्या है। (what is tally in hindi) -

दोस्तों tally के शॉर्टकट कीज के बारे में जानने से पहले हमें पता होना चाहिए टैली क्या है। टैली एक अकाउंट से संबंधित सॉफ्टवेयर है। जिसके अंदर किसी व्यक्ति या कंपनी द्वारा अकाउंट संबंधित लेनदेन की जानकारी एकत्रित करके रखी जाती है। इसके अंदर पैसे की गणना करना, कोई सी भी वस्तु कहा से खरीदी गई, कितने में खरीदी गई, कहां बेची गई, कितने में बेची गई इन सब की जानकारी tally के अंदर होती है। दोस्तों अगर आप tally क्या है, यह और अच्छे से जानना चाहते हैं, तो हमने टेली क्या है इससे संबंधित पोस्ट भी लिख रखी है। हम आपको यहां पर नीचे टैली क्या है, इसकी लिंक दे रहे हैं। आप इस लिंक पर क्लिक करके tally के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।


Tally क्या है। पूरी जानकारी हिंदी में।


टैली के शॉर्टकट कीज (Shortcut keys of tally in hindi) -

क्या आपने कभी सोचा है, कंप्यूटर में माउस के बिना कोई भी कार्य कैसे किया जाता है, नहीं ना। क्यों कंप्यूटर में बिना माउस के कार्य करना बहुत कठिन होता है। लेकिन दोस्तों tally में यह कार्य करना इतना भी कठिन नहीं होता है। यहां पर हम आपको tally में उपयोग होने वाले शॉर्टकट कीज की जानकारी देने वाले हैं।


F1 - एक ही directory में अलग-अलग Company को चुनने के लिए F1 keys का उपयोग किया जाता है।


F2 - इसका उपयोग दिनांक या मेनू अवधि बदलने के लिए किया जाता है।


F3 - इसका उपयोग एक ही directory की लिस्ट में से कंपनी को चुनने के लिए किया जाता है।


F4 - कॉन्ट्रा वाउचर का चयन करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।


F5 - भुगतान वाउचर का चयन करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।


F6 - रसीद वाउचर का चयन करने के लिए।


F7 - जर्नल वाउचर का चयन करने के लिए।


F8 - बिक्री वाउचर का चयन करने के लिए।


F9 - खरीद वाउचर का चयन करने के लिए।


F10 - ज्ञापन वाउचर का चयन करने के लिए।


F11 - कंपनी Features सेट करने के लिए या टैली के फीचर्स एक्टिवेट करने के लिए F11 keys का उपयोग किया जाता है।


F12 - कम्पनी कि कॉन्फिगर स्क्रीन का चयन करने के लिए F12 keys का उपयोग किया जाता है।

ALT+F1 - चालू कंपनी बंद करने के लिए, नई कंपनी खोलने के लिए, कंपनी की पूरी रिपोर्ट देखने के लिए ALT+F1 का उपयोग किया जाता है।


ALT+F2 - इसका उपयोग अवधि बदलने के लिए मतलब टैली में कंपनी पीरियड या रिपोर्ट पीरियड बदलने के लिए ALT+F2 का उपयोग किया जाता है।


ALT+F3 - नई कंपनी बनाने, या पासवर्ड देने, या फिर बैकअप restore या कंपनी की जानकारी का मेनु चयन करने के लिए ALT+F3 का उपयोग किया जाता है।


ALT+F4 - खरीद आदेश वाउचर चयन करने के लिए।


ALT+F5 - इस key का उपयोग बिक्री आदेश वाउचर यानी sales order वाउचर का चयन करने के लिए किया जाता है।


ALT+F6 -  इनकार करना।


ALT+F7 - Storck Journal या Menufectrur Journal का चयन करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।


ALT+F8 - डिलिवरी नोट बनाने के लिए।


ALT+F9 - रसीद नोट बनाने के लिए।


ALT+F10 - भौतिक स्टॉक करने के लिए।


ALT+F12 - इसका उपयोग मौद्रिक पर आधारित जानकारी फिल्टर करने के लिए किया जाता है।


ALT+2 - डुप्लीकेट वाउचर का प्रयोग करने के लिए तथा जहां जानकारी सीमा निर्दिष्ट की जाती है, वहां फिल्टर स्क्रीन को देखने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

ALT+A - इसका उपयोग वाउचर सूची में एक और वाउचर जोड़ने के लिए तथा कॉलमर रिपोर्ट में कॉलम बदलने के लिए किया जाता है।


ALT+C - वाउचर स्क्रीन पर मास्टर बनाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।


ALT+D - Entry को डिलीट करने या वाउचर हटाने के लिए किया जाता है।


ALT+E - Tally मैं किसी भी डॉक्यूमेंट को Excel, PDF, XML, HTML JPEG फॉर्मेट में एक्सपोर्ट (export) निर्यात करने के लिए।


ALT+H - इस key का उपयोग करने के लिए हम Tally में online या Local Help ले सकते हैं।


ALT+N - चालू कॉलम में रिपोर्ट देखने के लिए, Bank Book, Journal रजिस्टर, Group Summary के लिए।


ALT+M - इसकी सहायता से हम किसी भी डॉक्यूमेंट को ई-मेल कर सकते हैं।


ALT+O - इसका उपयोग वेबसाइट पर रिपोर्ट अपलोड करने के लिए किया जाता है।


ALT+P - इसका उपयोग किसी भी रिपोर्ट की print को निकालने के लिए किया जाता है।


ALT+R - एक रिपोर्ट में एक पंक्ति निकालने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।


ALT+S - हटाई गई पंक्ति को वापस लाने के लिए किया जाता है।


ALT+U - आखिरी वाली एंट्री या पंक्ति को पुनः प्राप्त करने के लिए उपयोग किया जाता है।


ALT+W - Tally Web Browser को देखने के लिए किया जाता है।


ALT+G - Tally में भाषा को बदलने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।


ALT+K - इसकी सहायता से हम Keyboard की भाषा बदल सकते हैं।


ALT+X -  Day Book या वाउचर सूची में वाउचर को रद्द करने के लिए।


CTRL+ALT+B - कंपनी वैधानिक निवारण की जांच के लिए।


CTRL+G - Group का चयन करने के लिए।


CTRL+ALT+I - Statutory Masters को Export करने के लिए।


CTRL+Q - किसी फॉर्म को छोड़ने के लिए।


CTRL+ALT+R - कंपनी के लिए Data फिर से लिखने के लिए।


CTRL+M - Tally स्क्रीन के मुख्य क्षेत्र व केलकुलेटर को बंद करने के लिए।


CTRL+N - Tally में केलकुलेटर को एक्टिवेट करने के लिए।


CTRL+R - इसका उपयोग एक ही वाउचर में कथन को दोहराने के लिए किया जाता है।


Ctrl+ALT+C - Tally में text की copy बनाने के लिए।


CTRL+ALT+V - Tally मैं किसी भी पाठ को लाने के लिए।


CTRL+F9 - इसका उपयोग Debit Note वाउचर का चयन करने के लिए किया जाता है।


Getway of tally keys - 

A - Getway of Tally से सीधा Account info पर जाने के लिए इसे दबाए।


I - Getway of Tally से सीधा Inventory Info पर जाने के लिए।


K - Getway of Tally से सीधा Quick Step पर जाने के लिए।


V - Getway of Tally से सीधा Accounting Voucher पर जाने के लिए।


T - Getway of Tally से सीधा Inventory Voucher पर जाने के लिए।


O - Getway of Tally से सीधा Import of Data पर जाने के लिए।


N - Getway of Tally से सीधा Banking पर जानें के लिए।


B - Getway of Tally से सीधा Balance sheet पर जाने के लिए।


P - Getway of Tally से सीधा Profit & Loss A\C पर जाने के लिए।


S - Getway of Tally से सीधा Stock Summary पर जाने के लिए।


R - Getway of Tally से सीधा Ratio Analysis पर जाने के लिए।


D - Getway of Tally से सीधा Display पर जाने के लिए।


M - Getway of Tally से सीधा Multi Account Printing पर जाने के लिए।


Q - Getway of Tally से सीधा Tally से बाहर जाने के लिए।


Shift+Enter - उपयोग विवरण के अगले स्तर को देखने के लिए।


ESC - आपने किसी भी फील्ड में जो टाइप किया उसे स्वीकार नहीं करने के लिए तथा दिल्ली से बाहर आने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

तो दोस्तो यह थे tally में उपयोग होने वाले shortcut keys. अब आप यह तो जान ही गए है, tally में shortcut keys का उपयोग कैसे किया जाता है। हमे उम्मीद है आपको हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी पसंद आई होगी।

Conclusion -

आज इस पोस्ट में हमने आपको tally में यूज होने वाली shortchut keys कोन कोन सी है, इसके बारे में आपको पूरी जानकारी दी है। में आशा करता हु की आप लोगो को टैली में उपयोग होने वाली शॉर्टकट कीज के बारे में अच्छे से समझ आया होगा। अगर यदि आपको अभी भी इस पोस्ट को लेकर कुछ डाउट्स है, तो आप हमे नीचे comments करके जरूर बताये।

ओर यदि आपको हमारी पोस्ट shortcut Key's of tally हिंदी में अच्छी लगी हो, ओर आपको इससे कुछ सीखने का मिला हो तो हमे comments करके जरूर बताए।ओर इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ whatsapp group , facebook ओर अन्य social networks site's पर शेयर करे और इस जानकारी को अन्य लोगो तक पहुचाने में हमारी मदद करे।

अभी के लिए बस इतना ही। हमारी इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। आपका दिन शुभ हो।

Tuesday, 21 September 2021

हैलो हेलो दोस्तों कैसे हैं, आप लोग। हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है। दोस्तों क्या अपने कभी अपने pc या laptop को बीना एंटीवायरस के चलाया है। कंप्यूटर सिस्टम में बिना किसी एंटीवायरस के अपने pc या लैपटॉप को चलाने का मतलब है, कि आप अपने लैपटॉप और कंप्यूटर में कई तरह के खतरनाक वायरस को दावत दे रहे हैं। यह वायरस आपके कंप्यूटर सिस्टम को पूरी तरह से हैंग या स्लो कर देते हैं, जिसकी वजह से आपका कंप्यूटर सिस्टम सही तरह से कार्य नहीं कर पाता है। और आपके कंप्यूटर सिस्टम में इंर्पोटेंट फाइल वह डॉक्यूमेंट होते हैं, उन्हें भी प्रभावित करता है। और आपके कंप्यूटर सिस्टम को पूरी तरह से धीमा कर देता है। कई वायरस तो इतने खतरनाक और पावरफुल होते हैं, जो कंप्यूटर को पूरी तरह से खराब कर देते हैं। जिसकी वजह से आपको भारी नुकसान भी होता है। आपकी इंपोर्टेंट फाइल और डॉक्यूमेंट नष्ट हो जाते हैं। 

दोस्तो इन वायरस को नष्ट करने के लिए एंटीवायरस सॉफ्टवेयर बनाया गया है। जो आपके कंप्यूटर सिस्टम में छुपे वायरस को ढूंढता है, और उन्हें नष्ट करता है। जिससे आपका कंप्यूटर सिस्टम सही तरीके से कार्य कर सकें। एंटीवायरस आपके कंप्यूटर में वायरस को ढूंढने का कार्य करता है, और साथ ही उन्हें डिलीट भी करता है। जिससे आपकी इंपोर्टेंट फाइल और डॉक्यूमेंट सुरक्षित रह सकें। वैसे तो मार्केट में कई तरह के एंटीवायरस मौजूद है, जो वायरस को नष्ट करने का कार्य करते हैं। लेकिन कुछ वायरस ऐसे भी होते हैं, जो नॉर्मल एंटीवायरस से पूरी तरह नष्ट नहीं होते हैं। और आपके कंप्यूटर सिस्टम में छुपे होते हैं। हम यहां पर ऐसे ही कुछ पावरफुल एंटीवायरस के बारे में बात करेंगे जो बहुत ही पावरफुल होते हैं। और उनके सामने कोई सा भी वायरस नहीं टिक पाता है। चाहे कितना भी पावरफुल वायरस हो वह इन एंटीवायरस से नहीं बच सकता है।

 तो चलिए हम आपको बताते कुछ ऐसे पावरफुल एंटीवायरस के बारे में जिनका use करके आप अपने कंप्यूटर को वायरस से सुरक्षित रख सकते हैं। लेकिन उससे पहले हम आपको यह बता देते है वायरस क्या है। 

वायरस क्या है।-

अगर आपको वायरस के बारे नहीं पता है, तो चलिए हम आपको बताते हैं, वायरस किसी भी कंप्यूटर प्रोग्राम के लिए एक ऐसा दोषपूर्ण प्रोग्राम है, जो जिसका उद्देश्य केवल और केवल कंप्यूटर में समाहित समुचित सूचनाओं को नष्ट करना होता है। कंप्यूटर की जितनी भी फाइल होती है, उन सभी सूचनाओं को खराब या करप्ट करना है। किसी भी कंप्यूटर यूजर की पहली प्राथमिकता ही अपने कंप्यूटर को वायरस से बचाना होना चाहिए। कंप्यूटर में वायरस आने के अनेक कारण हो सकते हैं, जिसके बारे में हमें भी कभी-कभी पता नहीं चल पाता है, कि हमारे कंप्यूटर में वायरस कैसे और कहां से आया है। वायरस कही से भी सकता है। किसी app को कंप्यूटर में install करते समय या फिर पेनड्राइव या मोबाइल से कंप्यूटर में डाटा ट्रांसफर करते समय। यह कही से भी आ सकता है। अब सवाल यह आता है, कि हम अपने कंप्यूटर को किस प्रकार से वायरस से सुरक्षित रख सके। और कंप्यूटर के अंदर रखे अपने डॉक्यूमेंट को किस तरह सुरक्षा प्रदान कर सके। जैसा कि हमें पता है, अगर कंप्यूटर में वायरस आता है, तो सबसे पहले हमारा ध्यान केवल एक ओर ही जाता है, और वह है एंटीवायरस। अब आप सोच रहे होंगे ये एंटीवायरस क्या है। तो हम आपको इसके बारे में नीचे बता रहे है।

Antivirus क्या है। -

दोस्तो एंटीवायरस वह प्रोग्राम है, जो कंप्यूटर और लैपटॉप को वायरस से सुरक्षित रखता है। Antivirus का प्रमुख काम कंप्यूटर को किसी भी प्रकार के वायरस से सुरक्षा प्रदान करना होता है। किसी भी कंप्यूटर सिस्टम में एंटीवायरस का होना बहुत जरूरी है। जब आप अपने कंप्यूटर सिस्टम में पेनड्राइव या USB केबल से  कुछ इंपोर्टेंट फाइल या डाटा का आदान प्रदान करते हैं, तब वायरस आपके कंप्यूटर सिस्टम में आने का ज्यादा खतरा होता है। जिसका असर आपके कंप्यूटर सिस्टम पर भी पड़ता है। जिसकी वजह से आपका कंप्यूटर या लैपटॉप या तो स्लो या हैंग होने लगता है। और आपका सिस्टम सही से काम नहीं कर पाता है। ऐसी situation में आप एंटीवायरस का उपयोग कर आप के लैपटॉप और कंप्यूटर से वायरस को delete कर सकते है। और लैपटॉप व कंप्यूटर को सही से access कर पाते हैं। इसलिए हमारे कंप्यूटर और लैपटॉप में एंटीवायरस का होना बहुत जरूरी है।

लैपटॉप और कंप्यूटर के लिए बेस्ट एंटीवायरस -

लैपटॉप और कंप्यूटर के लिए तो बहुत सारे antivirus है, लेकिन कुछ एंटीवायरस ज्यादा ही पॉवरफुल होते है। हम आपको था पर कुछ ऐसे ही एंटीवायरस के बारे में जानकारी देने वाले है, जो best है।

(1) Bitdefender - 
यदि आप अपने कंप्यूटर या लैपटॉप में एक सबसे अच्छा और पावरफुल एंटीवायरस इंस्टॉल करना चाहते हैं, तो आप Bitdefender एंटीवायरस का उपयोग कर सकते हैं। Bitdefender एक रोमानियाई साइबर सुरक्षा और एंटीवायरस सॉफ्टवेयर कंपनी है। जिसकी स्थापना 2001 में फ्लोरिन तलपे ने की थी। Bitdefender एंटीवायरस सॉफ्टवेयर, इंटरनेट सुरक्षा सॉफ्टवेयर, समापन बिंदु सुरक्षा सॉफ्टवेयर, और अन्य साइबर सुरक्षा और सेवाओं में उपयोग आने वाला एंटीवायरस है। Bitdefender सबसे बेहतरीन एंटीवायरस में से है, जो ऑनलाइन हो या ऑफलाइन किसी भी तरह के वायरस, मैलवेयर, हैकिंग जैसी समस्याओं से कंप्यूटर को सुरक्षित रखता है। Bitdefender एक एडवांस टेक्नोलॉजी का एंटीवायरस सॉफ्टवेयर है। और आपको कई तरह की सुरक्षा प्रदान करता है। अगर आप बिजनेस से रिलेटिव कोई कार्य करते हैं, और आपको एक पावरफुल व हाई सिक्योर एंटीवायरस चाहिए तो आपके लिए Bitdefender एंटीवायरस बेस्ट होगा। यह भी दो प्रकार का होता है। Bitdefender Antivirus Plus और Bitdefender Internet Security. यह दोनों ही बेस्ट एंटीवायरस है।
(2) Avast Premier - 
अगर मैं आपसे कहूं कि विंडो pc के लिए कोई फ्री एंटीवायरस हैं, तो आपको यह बात थोड़ी अजीब लगेगी। लेकिन जी हां दोस्तों विंडो pc के लिए अगर फ्री एंटीवायरस की बात आए तो वो है Avast. मैं Avast एंटीवायरस को बेस्ट मानता हूं। यह एंटीवायरस किसी भी मामले में पीछे नहीं रहता है। यह एक पावरफुल एंटीवायरस है। यह सॉफ्टवेयर आपको सभी तरह के फ्रीचर प्रदान करता है। वायरस प्रोटेक्शन, सॉफ्टवेयर अपडेट, इंटरनेट सिक्योरिटी आदि पावरफुल फ्रिचर हमे प्रदान करता है। इस एंटीवायरस का उपयोग करने पर हमें किसी भी तरह के कोई वायरस की समस्या देखने को नहीं मिलती है। तथा यह हमारे कंप्यूटर को खतरनाक वायरस से सुरक्षा प्रदान करता है।

(3) AVG Technology -
AVG एंटीवायरस जिसे पहले एवीजी के नाम से जाना जाता था।  एवीजी (AVG) टेक्नोलॉजी द्वारा विकसित एक एंटीवायरस सॉफ्टवेयर है। जो एवास्ट की सहायक कंपनी है। यह विंडोज मैकओएस और एंड्रॉयड के लिए उपलब्ध है। AVG टेक्नोलॉजी 1991 इंटरनेट और वायरस सिक्योरिटी पर काम कर रही है। अपनी लगातार जारी कोशिशों के बाद आज यह एक सबसे बेहतरीन एंटीवायरस में से एक है। यह कंप्यूटर सिस्टम में छोटे-छोटे वायरस को ढूंढता है, और उन्हें नष्ट कर देता है। अगर आपका सिस्टम किसी वायरस के कारण स्लो या हैंग होने लगता है, तो यह सॉफ्टवेयर उसे डिफेक्ट कर देता है। जिससे आपका कंप्यूटर तेजी से काम करने लगता है। AVG द्वारा बनाया गया AVG Ultimate एक बेहतरीन ऑल इन वन एंटीवायरस सॉफ्टवेयर है। यह आपको Spyware और Adware जैसी पर्सनल जानकारी में रोक लगाने वाले वायरस से मुक्त करता है।

(4) Kaspersky Total Security -
Kaspersky एंटीवायरस Kaspersky Lab द्वारा विकसित एक एंटीवायरस प्रोग्राम है, जो उपयोगकर्ता को मैलवेयर से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह मुख्य रूप से माइक्रोसॉफ्ट विंडोज और मैकओएस पर चलने वाले कंप्यूटरों के लिए डिजाइन किया गया है। यदि आप एक ऐसा सॉफ्टवेयर चाहते हैं, जो आपको all-in-one प्रोटेक्शन प्रदान करें तो Kaspersky एंटीवायरस आपके लिए सही होगा। यदि आपको आपके कंप्यूटर में एंटीवायरस, फायरवॉल सिक्योरिटी, पासवर्ड मैनेजर आदि फीचर आपको एक ही सॉफ्टवेयर पर चाहिए तो Kaspersky एंटीवायरस आपके लिए बेस्ट होगा। यह आपके इंटरनेट उपयोग करने पर अनचाहे कनेक्शन से सुरक्षा प्रदान करता है। तथा यह आपके कंप्यूटर में किसी भी तरह का वायरस व मैलवेयर नहीं आने देता है।

(5) Norton Security Standard -
Norton Security Standard एक एंटीवायरस है। जिसे सिमेंटेक कॉरपोरेशन द्वारा 1991 में कंप्यूटर सुरक्षा के लिए बनाया गया था। यह एंटीवायरस कंप्यूटर में वायरस की पहचान कर उन्हें नष्ट कर देता है। Norton एंटीवयरस एक बिजनेस सिक्योरिटी के लिए काफी अच्छा सॉफ्टवेयर है। यह आपको वाई-फाई, स्पैम ईमेल, वेब सिक्योरिटी जैसे ऑनलाइन वायरस से सुरक्षा प्रदान करता है। यदि आप कंप्यूटर में USB ड्राइव व पेनड्राइव का उपयोग बार-बार करते हैं, और उनसे आने वाले वायरस से परेशान है, तो यह सॉफ्टवेयर आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होगा। यह उनसे आने वाले वायरस को नष्ट कर देता है। और आपके कंप्यूटर को सुरक्षा प्रदान करता है।
तो दोस्तो यह थे कंप्यूटर के लिए बेस्ट एंटीवायरस। आप भी इन्हे अपने कंप्यूटर में install करके अपने डाटा को सुरक्षित रख सकतें है।

Conclusion -

आज इस पोस्ट में हमने आपको कंप्यूटर और लैपटॉप के लिए कोन से antivirus best है, इसके बारे में आपको पूरी जानकारी दी है। में आशा करता हु की आप लोगो को best antivirus for Computer and laptop in hindi  इसके बारे में अच्छे से समझ आया होगा। अगर यदि आपको अभी भी इस पोस्ट को लेकर कुछ डाउट्स है, तो आप हमे नीचे comments करके जरूर बताये।

ओर यदि आपको हमारी पोस्ट कंप्यूटर के लिए कोन सा antivirus अच्छा है। हिंदी में अच्छी लगी हो, ओर आपको इससे कुछ सीखने का मिला हो तो हमे comments करके जरूर बताए।ओर इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ whatsapp group , facebook ओर अन्य social networks site's पर शेयर करे और इस जानकारी को अन्य लोगो तक पहुचाने में हमारी मदद करे।

अभी के लिए बस इतना ही। हमारी इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। आपका दिन शुभ हो।



Saturday, 11 September 2021

हेलो दोस्तों तो कैसे हैं आप लोग आप लोगों का हमारे ब्लॉग पर स्वागत है। हम आपको कंप्यूटर नेटवर्किंग क्या है इसके बारे में बताने वाले हैं। दोस्तों इससे पहले हम आपको कंप्यूटर नेटवर्क क्या होता है इसके बारे में बता चुके हैं। आज हम आपको कंप्यूटर नेटवर्किंग क्या है, इसके कितने प्रकार होते हैं, यह कैसे काम करते हैं, इसके बारे में बताने वाले हैं।

जैसा कि हम सबको पता है आज के समय में हम सभी कामों को करने के लिए कंप्यूटर का उपयोग करते हैं। कंप्यूटर की सहायता से काम इतना जल्दी हो जाता है, कि हमें समय का पता ही नहीं चलता है। और गलती होने की भी गुंजाइश कम होती है। कंप्यूटर के उपयोग से हम दूसरे मशीन में सेव किया हुआ डेटा का उपयोग कर सकते हैं।

दोस्तों अगर आप भी कंप्यूटर नेटवर्किंग क्या है, यह जानना चाहते हैं, तो हमारे साथ आखिरी तक बने रहे। तो चलिए अब बिना देर किए शुरू करते है। लेकिन इससे पहले हम जान लेते हैं, कंप्यूटर नेटवर्क क्या है।

कंप्यूटर नेटवर्क क्या है।(what is computer network in hindi)-

कंप्यूटर नेटवर्क एक ऐसा सिस्टम होता है, जहां पर एक से अधिक कंप्यूटर information और resources के लिए जुड़े होते हैं। अर्थात जब एक या एक से अधिक कंप्यूटर को आपस में किसी माध्यम की सहायता से जोड़ा जाता है, तब इसे नेटवर्क कहते हैं। इस दौरान यह आपस में एक दूसरे से संचार तथा डाटा आदान प्रदान करते हैं। कंप्यूटर में एक नेटवर्क के दो या दो से अधिक को डिवाइसों का समूह होता है। जिसकी सहायता से हम कम्युनिकेशन कर सकते हैं। कंप्यूटर नेटवर्क एक बहुत सारे computers, servers, network, device का कलेक्शन होता है।

कंप्यूटर नेटवर्किंग की परिभाषा। (definition of computer networking in hindi)-

Computer networking कंप्यूटर के ग्रुप को कहा जाता है। जिन्हें केबल की मदद से एक दूसरे के साथ जोड़ा जाता है। कंप्यूटर नेटवर्क को डाटा नेटवर्क भी कहा जाता है। इसका उपयोग कंप्यूटर के बीच संवाद के माध्यम के रूप में किया जाता है। कंप्यूटर नेटवर्किंग मशीन तथा यूजर दोनों को कम्युनिकेट करने के लिए कुछ सेवाएं प्रदान करती है। जैसे Telephone lines, Satellite links, Cables, Wires, Radio Frequency आदि। कंप्यूटर नेटवर्किंग में एक कंप्यूटर द्वारा भेजा गया सिग्नल नेटवर्क से जितने भी मशीन जुड़े होते हैं, उन से होकर गुजरता है। और तब तक गुजरता है, जब तक वह अपने निर्धारित स्थान तक ना पहुंच जाए।

कंप्यूटर नेटवर्किंग के मुख्य उद्देश्य -

वर्कलोड डिस्ट्रीब्यूशन (workload distribution)- 
एक ऑर्गेनाइजेशन में उपयोग में लाए जा रहे, सभी कंप्यूटर को नेटवर्क कैसे जोड़े जाने के कई उपयोग है। उदाहरण के लिए अगर एक टीम को कोई प्रोजेक्ट दिया जाता है, और उसमें से एक कर्मचारी अपना काम दूसरे कर्मचारी को देना चाहता है, जिससे उसका काम जल्दी से जल्दी पूरा हो सके। तो कंप्यूटर नेटवर्किंग की सहायता से ऐसा हो सकता है। क्योंकि सभी कंप्यूटर नेटवर्क से जुड़े होने के कारण कोई भी कर्मचारी अपना काम दूसरे को आसानी से दे सकता हैं।

रिसोर्स शेयरिंग (resource sharing)-
रिसोर्स शेयरिंग का मुख्य उद्देश्य होता है,  कि उपलब्ध संसाधनों को अधिकतम उपयोग किया जाए। कंप्यूटर नेटवर्क में जोड़े गए सभी कंप्यूटरों के लिए समान अतिरिक्त उपकरण, प्रिंटर, स्केनर दिए जाते हैं। तब नेटवर्क से जुड़े हुए सभी कंप्यूटर इन उपकरणों का साझा उपयोग करते हैं।
सेविंग मनी (saving money)-
ज्यादातर एक ऑर्गेनाइजेशन का मुख्य उद्देश्य होता है, कम से कम खर्चे में ज्यादा काम किया जाए। ताकि ऑर्गेनाइजेशन को ज्यादा मुनाफा हो सके। हम नेटवर्क में बड़े शक्तिशाली कंप्यूटर के बजाए छोटे और कम शक्तिशाली कंप्यूटर को जोड़ सकते हैं। जिससे काम उसी तेजी के साथ होगा, जिस तरह से शक्तिशाली कंप्यूटर के नेटवर्क में होता है। इस तरह से पैसे की बचत होगी, और मुनाफा भी ज्यादा मिलेगा।

कंप्यूटर नेटवर्किंग की जरूरत -

(•) किसी भी प्रकार के डाटा को उस नेटवर्क से संबंधित दूसरे लोगों को देना।

(•) डाटा को उससे संबंधित जगह पर भेजना।

(•) इंटरनेट में उपलब्ध resources से जानकारी इकट्ठा करना।

(•) Quick link बनाकर नेटवर्क से जुड़ी जानकारी अन्य लोगों तक पहुंचाना।

(•) दूसरे लोगों के साथ ई-मेल की सहायता से बात करना।

नेटवर्क के प्रकार (types of computer network in hindi)-

(1) लोकल एरिया नेटवर्क -
इसका पूरा नाम Local Area Network होता है। यह एक ऐसा नेटवर्क उड़ता है जिसका उपयोग दो या दो से अधिक कंप्यूटर को जोड़ने के लिए किया जाता है। यह नेटवर्क आपको हर जगह पर देखने को मिलेगा। जैसे - ऑफिस, कॉलेज, स्कूल, बिजनेस आदि में। इसमें नेटवर्क में इथरनेट और वाई-फाई तकनीक का ज्यादा उपयोग किया जाता है। मगर इसमें केबल पर कम ध्यान दिया जाता है। यह एक ऐसा नेटवर्क है जो आपको स्थानीय इलाकों में ज्यादा देखने को मिलता है। इस नेटवर्क को बनाने के लिए ज्यादा Hardware की जरूरत नहीं पड़ती है। यह नेटवर्क कामकाज की जगह पर बनाया जाता है। इसमें एक मुख्य कंप्यूटर यानी server होता है जहां पर संस्था से संबंधित डाटा रखा जाता है। और अन्य कंप्यूटर से जोड़ दिया जाता है। इस कंप्यूटर की खासियत यह होती है कि इसकी स्पीड तेज होती है। इसमें कम खर्चा होता है तथा यह जगह सुरक्षित भी होते हैं।

(2) मेट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क (metropolitan area network)-
यह एक पूरे शहर को जोड़ने वाला नेटवर्क होता है। यह एक शहर में जितने भी collage, school, government office होते हैं सबको यह आपस में जोड़े रखता है। यह नेटवर्क एक या एक से ज्यादा PAN, LAN नेटवर्क से मिलकर बना होता है। तथा इसका दायरा सैकड़ो किलोमीटर तक होता है। इस नेटवर्क की मदद से 70 से 100 km ki दूरी पर स्थित अन्य कंप्यूटरों को भी डाटा भेजा जा सकता है। बहुत सारे Lans को आपस में कनेक्ट करके बड़ा नेटवर्क बनाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।

(3) वाइड एरिया नेटवर्क (wide area network)-

LAN ओर MAN के बाद जो नेटवर्क होता है उसे WAN कहा जाता है। यह क्षेत्रफल की दृष्टि से बहुत बड़ा नेटवर्क होता है। यह नेटवर्क एक बिल्डिंग या एक शहर में सीमित न रहकर पूरे विश्व को जोड़ने का कार्य करता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क होता है। तथा इसका दायरा सबसे बड़ा होता है। इस नेटवर्क में डाटा को सुरक्षित भेजा वह प्राप्त किया जाता है। WAN नेटवर्क से बहुत सारे LAN और MAN जुड़े रहते हैं। और यह आपस में डाटा को शेयर करते रहते हैं। इस नेटवर्क की सहायता से आप दुनिया के किसी भी कंप्यूटर से कुछ पल में जुड़ सकते हैं। इस नेटवर्क की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि इसमें Data रेट कम होती है। लेकिन यह ज्यादा distance cover करता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण है इंटरनेट।

इस नेटवर्क में बहुत सारी तकनीक तथा protocol का उपयोग होता है। और इसको अन्य छोटे नेटवर्क से जोड़ने के लिए ISP5 की जरूरत पड़ती है। इसलिए यह नेटवर्क अन्य नेटवर्को की तुलना में बहुत महंगा होता है। WAN नेटवर्क भी दो तरह के होते हैं। Enterprise WAN ओर Global WAN । wide Area नेटवर्क से कनेक्ट होने वाले कंप्यूटर ज्यादा public Network का इस्तेमाल करते हैं।

कंप्यूटर नेटवर्किंग के उपयोग करने के लाभ -

(1) त्रुटियों का कम होना - इसे सभी कर्मचारी या यूजर निर्देशों केेेे अनुसार काम करते है। इसलिए ऑर्गेनाइजेशन का ज्यादा से ज्यादा काम करा सकती है। और उनकी consistency मैं सुधार लाया जा सकता है। जिससे त्रुटियां होने की संभावना बहुत कम होती है।
(2) कम लागत और दक्षता में सुधार - एक important की जानकारी संग्रहित करना और उस कार्य को stabilize करने में सुधार कर सकता है। जिससे उनकी लागत कम हो जाती है। और उनकी दक्षता में सुधार होता जाता है।

(3) कम्युनिकेशन सही होना - जैसे-जसे कार्य आगे बढ़ता है,  वैसे ही कर्मचारियों के बीच में अच्छा कम्युनिकेशन होना जरूरी  कम्युनिकेशन सही होगा तो कार्य में सुधार अपने आप होता जाएगा।

कंप्यूटर नेटवर्किंग के लिए जरूरी घटक -

सेंडर (sender) - जब एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर को सिग्नल भेजा जाता है, तो सिग्नल भेजने वाले को कंप्यूटर साइंस की भाषा में सेंडर कहा जाता है। सेंडर कंप्यूटर नेटवर्किंग के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि यही कंप्यूटरो के बीच में कम्युनिकेशन की शुरुआत करता है। जिसके कारण नेटवर्क कार्य करता है।

रिसीवर (receiver) - sender द्वारा भेजा गया सिग्नल जो मशीन स्वीकार करती है, उसे रिसीवर कहा जाता है। सेंडर द्वारा भेजा गया सिग्नल विभिन्न मशीनों से होकर गुजरता है, लेकिन इस सिग्नल को रिसीवर के अलावा कोई और नहीं पढ़ पाता है। सेंडर द्वारा जो कम्युनिकेशन लिंक तैयार की जाती है, वह रिसीवर तक पहुंचने के बाद ही खत्म होती है।

केबल (cable) - केबल की सहायता से एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर को जोड़ा जाता हैै। तथा नेटवर्क में सभी उपलब्ध कंप्यूटरों को जोड़ने के लिए कई प्रकार की केबलों का उपयोग किया जाता हैै। इनमें जो केवल मुख्य रूप से उपयोग की जाती है, वह ऑप्टिक फाइबर केबल,  ट्विस्टेड पैर केेबल, को-एक्सियल केबल आदि है।

कॉन्स्टेंट पावर सप्लाई (constant power supply) - कंप्यूटर नेटवर्क के सुचारू रूप से काम करने के लिए बिजली की आवश्यकताा होती हे। अगर बीच में बिजली चली जाती है तो नेटवर्क का काम रुक जाता है।

स्विच (switch) 

नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर (network operating system software)

नेटवर्किंग में काम आने वाली डिवाइस -

डेस्कटॉप कंप्यूटर, लेपटॉप, मेनफ्रेम(main frames), सर्वर(server), फायरवॉल(firewalls), रिपीटर(Repeaters), ब्रिजस(Bridges), स्मार्टफोन(Smartphone),ओर टैबलेट (smartphone, and tablet), वेबकैम(webcame), Camera, Printers, Fats, Modem, Switches, Hubs, Routers आदि।

Conclusion -

आज इस पोस्ट में हमने आपको कंप्यूटर नेटवर्किंग किसे कहते है। तथा यह कैसे कार्य करती है। इसके उपयोग के बारे में आपको पूरी जानकारी दी है। में आशा करता हु की आप लोगो को कंप्यूटर नेटवर्किंग किसे कहते है। इसके बारे में अच्छे से समझ आया होगा। अगर यदि आपको अभी भी इस पोस्ट को लेकर कुछ डाउट्स है, या फिर हमारी इस पोस्ट में कुछ सुधार करने की जरूरत है, तो आप हमे नीचे comments करके जरूर बताये।

ओर यदि आपको हमारी पोस्ट कंप्यूटर नेटवर्किंग क्या है। हिंदी में अच्छी लगी हो ओर आपको इससे कुछ सीखने का मिला हो तो हमे comments करके आप जरूर बताए।ओर इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ whatsapp group , facebook ओर अन्य social networks site's पर शेयर करे और इस जानकारी को अन्य लोगो तक पहुचाने में हमारी मदद करे।

अभी के लिए बस इतना ही। हमारी इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। आपका दिन शुभ हो।

Thursday, 9 September 2021

हेलो दोस्तों तो कैसे हैं, आप लोग। हमारे blog पर आपका स्वागत है। दोस्तों क्या आप एंटीवायरस क्या है यह जानते है। अगर नहीं तो आज हम antivirus क्या है, इसके बारे में जानेंगे।

यदि आप एक कंप्यूटर यूजर है तो आपको एंटीवयरस की जानकारी होना जरूरी है। अगर आपको एंटीवायरस की जानकारी है तो संभव ही आपको पता होगा कि वायरस क्या है। और कंप्यूटर सिस्टम पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

दोस्तो अगर आप भी antivirus किसे कहते है, यह जानना चाहते है, तो हमारे साथ आखिरी तक बने रहें।हम आपको यहां पर antivirus की पूरी जानकारी देने वाले है। तो चलिए अब बिना देर किए शुरू करते है। लेकिन antivirus के बारे में जानने से पहले हम जान लेते है वायरस क्या है।  

वायरस किसे कहते है।-

अगर आपको वायरस के बारे नहीं पता है, तो चलिए हम आपको बताते हैं, वायरस किसी भी कंप्यूटर प्रोग्राम के लिए एक ऐसा दोषपूर्ण प्रोग्राम है, जो जिसका उद्देश्य केवल और केवल कंप्यूटर में समाहित समुचित सूचनाओं को नष्ट करना होता है। कंप्यूटर की जितनी भी फाइल होती है, उन सभी सूचनाओं को खराब या करप्ट करना है। किसी भी कंप्यूटर यूजर की पहली प्राथमिकता ही अपने कंप्यूटर को वायरस से बचाना होना चाहिए। कंप्यूटर में वायरस आने के अनेक कारण हो सकते हैं, जिसके बारे में हमें भी कभी-कभी पता नहीं चल पाता है, कि हमारे कंप्यूटर में वायरस कैसे और कहां से आया है। वायरस कही से भी सकता है। किसी app को कंप्यूटर में install करते समय या फिर पेनड्राइव या मोबाइल से कंप्यूटर में डाटा ट्रांसफर करते समय। यह कही से भी आ सकता है। अब सवाल यह आता है, कि हम अपने कंप्यूटर को किस प्रकार से वायरस से सुरक्षित रख सके। और कंप्यूटर के अंदर रखे अपने डॉक्यूमेंट को किस तरह सुरक्षा प्रदान कर सके। जैसा कि हमें पता है, अगर कंप्यूटर में वायरस आता है, तो सबसे पहले हमारा ध्यान केवल एक ओर ही जाता है, और वह है एंटीवायरस। अब आप सोच रहे होंगे ये एंटीवायरस क्या है। तो हम आपको इसके बारे में नीचे बता रहे है।

एंटीवायरस क्या है।(what is antivirus in hind) -

दोस्तो एंटीवायरस वह प्रोग्राम है, जो कंप्यूटर और लैपटॉप को वायरस से सुरक्षित रखता है। Antivirus का प्रमुख काम कंप्यूटर को किसी भी प्रकार के वायरस से सुरक्षा प्रदान करना होता है। किसी भी कंप्यूटर सिस्टम में एंटीवायरस का होना बहुत जरूरी है। जब आप अपने कंप्यूटर सिस्टम में पेनड्राइव या USB केबल से  कुछ इंपोर्टेंट फाइल या डाटा का आदान प्रदान करते हैं, तब वायरस आपके कंप्यूटर सिस्टम में आने का ज्यादा खतरा होता है। जिसका असर आपके कंप्यूटर सिस्टम पर भी पड़ता है। जिसकी वजह से आपका कंप्यूटर या लैपटॉप या तो स्लो या हैंग होने लगता है। और आपका सिस्टम सही से काम नहीं कर पाता है। ऐसी situation में आप एंटीवायरस का उपयोग कर आप के लैपटॉप और कंप्यूटर से वायरस को delete कर सकते है। और लैपटॉप व कंप्यूटर को सही से access कर पाते हैं। इसलिए हमारे कंप्यूटर और लैपटॉप में एंटीवायरस का होना बहुत जरूरी है।

एंटीवायरस की परिभाषा -

अगर हम आसान शब्दों में समझें तो एंटीवायरस वह सॉफ्टवेयर होता है, जो कंप्यूटर में गुप्त सभी वायरस प्रोग्राम को डिलीट करने का कार्य करता है। तथा हमारे कंप्यूटर की विभिन्न फाइलों को सुरक्षित रखने का कार्य करता है। एंटीवायरस किसी भी वायरस से हमारे कंप्यूटर को सुरक्षा प्रदान करने का कार्य करता है। एंटीवायरस को anti-malware सॉफ्टवेयर भी कहा जाता है। क्योंकि यह कंप्यूटर और लैपटॉप सिस्टम में malware spyware आदि खतरनाक प्रोग्राम का पता लगाने तथा उन्हें डिलीट करने का कार्य करने में सक्षम होता है। एंटीवायरस किसी सिस्टम में Adware, Spyware, Trojan Horse आदि खतरनाक प्रोग्राम से यूजर के डाटा को सुरक्षित करता है। एंटीवायरस का निर्माण कंप्यूटर में वायरस का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के लिए किया गया है। वर्तमान समय में अत्याधुनिक तकनीक के एंटीवायरस मौजूद है, जो कंप्यूटर और लैपटॉप की सुरक्षा प्रदान करने के लिए है। आपको यह जानना भी आवश्यक है, कि एंटीवायरस का उपयोग ना सिर्फ कंप्यूटर में बल्कि सोशल इंजीनियरिंग, इंटरनेट बैंकिंग आदि से होने वाले online हमलों से उपयोगकर्ताओं को बचाने के लिए उपयोग किए जा रहे हैं।

एंटीवायरस कैसे काम करता है।-

कंप्यूटर सिस्टम और लैपटॉप में कोई भी एंटीवायरस अपने डेटाबेस में उपलब्ध जानकारी को फाइल के रूप में स्कैन करता है। यदि डेटाबेस में कोई पैटर्न समान होता है, तो एंटीवायरस उससे वायरस का नाम देता है। जब भी हम कंप्यूटर सिस्टम में कोई भी फाइल इंस्टॉल करते हैं, तो एंटीवायरस पहले से उसे स्कैन करता है। स्कैन करने के पश्चात कंप्यूटर सिस्टम में कोई प्रोग्राम एंटीवायरस के प्रोग्राम के समान होता है, तो एंटीवायरस उस प्रोग्राम को वायरस का नाम दे देता है। वायरस को स्कैन करने और पहचानने की एंटीवायरस की भी भिन्न-भिन्न प्रकृतिया होती है। जब एंटीवायरस के द्वारा वायरस को पहचान लिया जाता है, तो यह कंप्यूटर और लैपटॉप सिस्टम में प्रोग्राम यूजर को संदेश के द्वारा इस खतरनाक प्रोग्राम की जानकारी उपलब्ध करवाता है। जिससे यूजर अपनी जानकारी और सुझाए गए उपायों के द्वारा वायरस को नष्ट कर देता है। इस तरह हमारा कंप्यूटर और लैपटॉप सुरक्षित हो जाता है।

एंटीवायरस का इतिहास -

आज से करीब 80 वर्ष पहले कंप्यूटर वायरस का जन्म हुआ था। तथा पहला ज्ञात कंप्यूटर वायरस क्रीपर वायरस के नाम से जाना गया था। उस समय में अधिक मात्रा में उपयोग किए जाने वाले कंप्यूटर मेनफ्रेम कंप्यूटर हुआ करते थे। तब यह वायरस मेनफ्रेम कंप्यूटर को ही संक्रमित करता था।

उस समय इस वायरस को हटाने के लिए अनेक प्रकार के शोध किए गए, तब जाकर हमें "रे टॉमलिंसन" द्वारा क्रीपर वायरस को नष्ट करने के लिए एक प्रोग्राम बनाया गया। जिसे हम द रीपर के नाम से भी जानते थे। इस वायरस के जन्म के बाद सन् 1981 में एक एल्क क्लोनर वायरस का जन्म हुआ। जिसने एप्पल कंपनी के दूसरी सीरीज के कंप्यूटर पर वायरस हमला किया। वर्ष 1987 में एंड्रियास   ल्यूनिंग तथा काईफेज नाम के व्यक्तियों द्वारा पहला एंटीवायरस लॉन्च किया गया। उसी वर्ष 1987 में MCAFee कंपनी द्वारा virus scan नामक एंटीवायरस लॉन्च किया गया। फिर समय के साथ-साथ 1989 तक एंटीवायरस का निर्माण करने वाली अनेक कंपनियों के निर्माण में वृद्धि होती गई। अब वर्तमान समय में ऐसे अनेक एंटीवायरस का निर्माण हो गया, जिसे कई हद तक वायरस को पहचान कर उन्हें नष्ट किया जा सकता है। सन 1990 में कंप्यूटर एंटीवायरस अनुसंधान संगठन (CARO) की स्थापना की गई। तथा 1992 में AVG तकनीक का विकास किया गया। AVG एंटीवायरस का पहला संस्करण भी इसी वर्ष लॉन्च किया गया। जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता गया और कई सारी कंपनियों ने एंटीवायरस बनाने पर ध्यान दिया।

एंटीवायरस से संबंधित जरूरी जानकारी।-

Full System Scaning आपके लिए तब उपयोगकारी होती, जब आपके द्वारा अपने कंप्यूटर सिस्टम में एंटीवायरस को अपलोड किया गया हो। Antivirus द्वारा कंप्यूटर सिस्टम में स्कैन कर यह सुनिश्चित किया जाता है, कि कंप्यूटर सिस्टम में पहले से वायरस मौजूद है या नहीं।

Virus Definition - 

एक एंटीवायरस प्रोग्राम Malware की पहचान करने के लिए वायरस की परिभाषा का उपयोग करता है। किसी फाइल या सॉफ्टवेयर को स्कैन करते समय यदि सिस्टम किसी मेलवेयर से पीड़ित फाइल को ढूंढता है, तो मेलवेयर की परिभाषा में वह मैलवेयर के समान होता है। कहने का तात्पर्य है, कि कंप्यूटर सिस्टम मेलवेयर ढूंढने के पश्चात ही उसे रोकने के साथ उसे नष्ट कर देता है।

Background Scanning - 

यह आमतौर पर सिस्टम के बैक एंड पर कोई फाइल को ओपन रखते हैं। एक एंटीवायरस कंप्यूटर और लैपटॉप सिस्टम में उन सभी फाइलों को सुरक्षित रखता है, जो सिस्टम को दुर्भाग्यपूर्ण हमलों से बचाता है। अतः बैकग्राउंड स्कैनिंग द्वारा एंटीवायरस कंप्यूटर को सुरक्षा प्रदान करता है।
तो दोस्तो यह थी एंटीवायरस के बारे में जानकारी। मुझे आशा है आपकी इससे कुछ सीखने को मिला होगा। और आपको हमारी यह जानकारी पसंद आई होगी।

Conclusion -

आज इस पोस्ट में हमने आपको एंटीवायरस किसे कहते है। ओर इसके उपयोग कहा किया जाता है। इसके बारे में आपको पूरी जानकारी दी है। में आशा करता हु की आप लोगो को antivirus किसे कहते है। इसके बारे में अच्छे से समझ आया होगा। अगर यदि आपको अभी भी इस पोस्ट को लेकर कुछ डाउट्स है, तो आप हमे नीचे comments करके जरूर बताये।

ओर यदि आपको हमारी पोस्ट antivirus किसे कहते है। हिंदी में अच्छी लगी हो, ओर आपको इससे कुछ सीखने का मिला हो तो हमे comments करके जरूर बताए।ओर इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ whatsapp group , facebook ओर अन्य social networks site's पर शेयर करे और इस जानकारी को अन्य लोगो तक पहुचाने में हमारी मदद करे।

अभी के लिए बस इतना ही। हमारी इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। आपका दिन शुभ हो।

Tuesday, 7 September 2021

हेलो दोस्तों तो कैसे हैं, आप लोग। आज हम सॉफ्टवेयर के बारे में जानेंगे। यह क्या होता है, कितने प्रकार के होते हैं, और यह कैसे कार्य करते हैं। जैसा कि आपने बहुत बार सॉफ्टवेयर का नाम तो सुना होगा, अपने दोस्तों से सुना होगा कि यह सॉफ्टवेयर बहुत अच्छा है। तब आपके दिमाग में भी ख्याल आया होगा कि आखिर यह सॉफ्टवेयर है क्या।

आप में से बहुत सारे को सॉफ्टवेयर के बारे में पता भी होगा, लेकिन अगर आपको नहीं पता है, कि सॉफ्टवेयर क्या है। तो आज हम इस पोस्ट में सॉफ्टवेयर के बारे में पड़ेंगे। अगर आप भी सॉफ्टवेयर क्या है, यह जानना चाहते हैं, तो आप हमारे साथ आखरी तक बने रहे। हम आपको यहां पर सॉफ्टवेयर क्या है, तथा यह कितने प्रकार के होते हैं इसकी पूरी जानकारी देंगे।

सॉफ्टवेयर क्या है। (what is software in Hindi)-

कंप्यूटर सिस्टम मैं सॉफ्टवेयर निर्देशों तथा प्रोग्राम का वह समूह होता है, जो कंप्यूटर द्वारा दिए गए कार्य को पूरा करने के लिए निर्देश देता है। कंप्यूटर सिस्टम में सॉफ्टवेयर संपर्क तथा जरूरी सूचनाओं का ऐसा तंत्र होता है, जो कंप्यूटर द्वारा सॉफ्टवेयरो को आदेश दिया निर्देश देकर क्रमश मनचाहा काम करवाता है। अगर हम सही परिभाषा में कंप्यूटर को परिभाषित करें, तो हम हार्डवेयर को मनुष्य और सॉफ्टवेयर को उसके आत्मा कह सकते हैं। सॉफ्टवेयर यूजर तथा कंप्यूटर के बीच इंटरफ़ेस का काम करता है। अर्थात यह निर्देशों का एक ऐसा समूह होता है, जो हार्डवेयर को कमांड देने के लिए उपयोग किया जाता है। इसके द्वारा हमे हमारे अनुरूप आउटपुट मिलते हैं। हम यह कह सकते हैं, की आप अभी इस पोस्ट या lesson को एक सॉफ्टवेयर पर ही पढ़ रहे हैं। जिसका नाम है, वेब ब्राउजर। 
कंप्यूटर अपने आप ही कोई कार्य नहीं कर सकता, कंप्यूटर को अपना कार्य करने के लिए कुछ उपकरणों और प्रोग्राम की आवश्यकता होती है। यह उपकरण और प्रोग्राम की कंप्यूटर को कार्य करने लायक बनाते हैं। बिना सॉफ्टवेयर के कंप्यूटर एक निर्जीव वस्तु है। वह किसी काम का नहीं होता है। Software को आप अपनी आंखों से नहीं देख सकते हैं, और ना ही इसे छू सकते हैं। क्योंकि इसका कोई भी भौतिक अस्तित्व नहीं होता है। यह एक आभासी वस्तु है, जिसे केवल आभास करके समझा जा सकता है। सॉफ्टवेयर के बिना कंप्यूटर कुछ भी नहीं है। उदाहरण के लिए अगर आपने कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर नहीं होगा, तो आपका कंप्यूटर कुछ भी काम का नहीं होगा। वह एक मृत प्राणी के समान होगा। जो केवल लोहे व अन्य धातु से बना एक मात्र बॉक्स ही रह जाएगा। अगर आप आपके कंप्यूटर में ms office का उपयोग कर रहे हैं, तो वह भी एक सॉफ्टवेयर है। अगर आप photoshop, typing master, tally का उपयोग कर रहे हैं, तो वह भी एक सॉफ्टवेयर है। जिसका उपयोग करके आप अपना कार्य कर रहे हैं। यही सॉफ्टवेयर आपके कंप्यूटर को अलग-अलग कार्य करने के योग्य बनाते हैं। सॉफ्टवेयर कंप्यूटर के लिए एक अमृत के समान होता है। जो कंप्यूटर में जान फुकता है, उसे काम करने के योग्य बनाता है। और आप भी सॉफ्टवेयर की सहायता से कंप्यूटर से अपना मनपसंद काम करवा सकते हैं।

सॉफ्टवेयर के प्रकार - 

हम कंप्यूटर का उपयोग विभिन्न प्रकार के कामों के लिए करते हैं। कंप्यूटर में सभी कामों को करने के लिए हम एक सॉफ्टवेयर का ही उपयोग नहीं करते हैं। सब कामों को करने के लिए अलग-अलग प्रकार के सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं। हर काम को करने के लिए उसकी जरूरत के हिसाब से सॉफ्टवेयर बनाया जाता है। और जिस काम के लिए जो सॉफ्टवेयर बनाया जाता है, वह काम केवल वही सॉफ्टवेयर कर सकता है। कोई दूसरा सॉफ्टवेयर उस काम को नहीं कर सकता है। अध्ययन की सुविधा के लिए मुख्य रूप से दो प्रकार के सॉफ्टवेयर बनाए गए हैं। 

सिस्टम सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर।

System software - 
इसमें कंप्यूटर के डिफॉल्ट प्रोग्राम शामिल होते हैं। जो कंप्यूटर के मूलभूत कार्यों को संभालते हैं। इनके द्वारा ही कंप्यूटर सिस्टम के अलग-अलग हार्डवेयर घटकों को नियंत्रित करने का कार्य करते हैं। अर्थात सिस्टम सॉफ्टवेयर वह सॉफ्टवेयर होते हैं, जो हार्डवेयर का प्रबंध एवं नियंत्रण करने का कार्य करते है। हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच क्रिया करने देते है। सिस्टम सॉफ्टवेयर कई प्रकार के होते हैं।

(1) Utility - Utility को हम सर्विस प्रोग्राम के नाम से भी जानते हैं। यह कंप्यूटर संसाधनों के प्रबंधन और सुरक्षा का कार्य करते हैं। इनका हार्डवेयर से सीधा संबंध नहीं होता है। Disk Defragmenter, Antivirus आदि Utility प्रोग्राम हैं।

(2) Operating System - ऑपरेटिंग सिस्टम एक ऐसा कंप्यूटर प्रोग्राम होता है, जो अन्य कंप्यूटर प्रोग्रामो का संचालन करता है। ऑपरेटिंग सिस्टम यूज़र तथा कंप्यूटर के बीच मध्यस्थता का कार्य करता है। यह हमारे द्वारा दिए गए निर्देशों को कंप्यूटर को समझाता है। उदाहरण- Windows, Linux, Android

Application Software - 
यह एक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर होता है, जो यूजर को एक या एक से अधिक कार्य करने में मदद करता है। इन्हें उपयोगकर्ता प्रोग्राम, End User सॉफ्टवेयर कहा जा सकता है। क्योंकि इनका सीधा संबंध यूजर से होता है। एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर यूजर को कोई विशेष कार्य करने के लिए आजादी प्रदान करते हैं। इनके निम्न प्रकार होते हैं।
(1) Basic Application - इन्हें हम सामान्य उद्देश्य सॉफ्टवेयर भी कहते हैं। इन सॉफ्टवेयर का उपयोग हम रोजमर्रा के कार्य को करने के लिए करते हैं।

(2) Multimedia Programs - मल्टीमीडिया अंग्रेजी के multi तथा media से मिलकर बना है। मल्टी (multi) का अर्थ है, बहु तथा मीडिया का अर्थ है, माध्यम। मल्टीमीडिया एक माध्यम होता है, जिसके द्वारा विभिन्न प्रकार की जानकारी को विविध प्रकार के माध्यमों से जैसे- टेक्स्ट, ऑडियो, ग्राफिक, एनिमेशन, वीडियो आदि का संयोजन कर दर्शकों तक पहुंचाया जाता है। यहां हम कुछ Basic Application के general software के नाम बता रहे हैं।

(•) DTP Programs

(•) word processing programs

(•) Graphics Application

(•) Web Design Application आदि।

(2) Specialized Application -  इन्हें हम बहुउद्देशीय सॉफ्टवेयर भी कहते हैं। इन सॉफ्टवेयर को किसी खास उद्देश्य के लिए बनाया जाता है। इनका उपयोग हम किसी विशेष कार्य को करने के लिए करते हैं। नीचे कुछ विशेष उद्देश्य के लिए बनाए गए प्रोग्राम के नाम दिए गए हैं।

(•) Billing Software

(•) Reservation System 

(•) Accounting Software

(•) Payroll Management System

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर कैसे बनाते हैं।

एक व्यक्ति जो कंप्यूटर प्रोग्राम के बारे में जानता है, उसे हम डेवलपर, प्रोग्रामर या सॉफ्टवेयर इंजीनियर कहते हैं। इनके द्वारा कंप्यूटर सॉफ्टवेयर बनाए जाते हैं। कुछ कंप्यूटर सॉफ्टवेयर बनाना थोड़ा सा कठिन काम है, क्योंकि कंप्यूटर सॉफ्टवेयर बनाने के लिए आपको प्रोग्रामिंग लैंग्वेज भी अच्छी जानकारी होना चाहिए। तभी आप अच्छे से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर बना सकते हैं। सॉफ्टवेयर बनाने के लिए बहुत सारी प्रोग्रामिंग भाषाओं का विकास किया गया है। आप इन भाषाओं का अध्ययन करके सॉफ्टवेयर बना सकते हैं। आप इन भाषाओं का अध्ययन करके अपनी जरूरत के मुताबिक अलग-अलग सॉफ्टवेयर का निर्माण कर सकते हैं। आप सभी भाषाओं के विशेषज्ञ तो नहीं बन सकते, लेकिन आप कोशिश करोगे तो आपको प्रोग्रामिंग भाषा के बारे में बहुत जानकारी होगी। आप शुरुआत Java, C, C++  प्रोग्रामिंग भाषा सीख कर प्रोग्रामिंग भाषा की शुरुआत कर सकते हैं।
तो दोस्तो यह अब तो आपको समझ आ गया होगा सॉफ्टवेयर किसे कहते है। और यह कितने प्रकार के होते है। हमे उम्मीद है आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसंद आई होगी।

Conclusion -

आज इस पोस्ट में हमने आपको Software किसे कहते है। तथा यह कितने प्रकार के होते है। ओर इसके उपयोग के बारे में आपको पूरी जानकारी दी है। में आशा करता हु की आप लोगो को सॉफ्टवेयर किसे कहते है। इसके बारे में अच्छे से समझ आया होगा। अगर यदि आपको अभी भी इस पोस्ट को लेकर कुछ डाउट्स है, या फिर हमारी इस पोस्ट में कुछ सुधार करने की जरूरत है, तो आप हमे नीचे comments करके जरूर बताये।

ओर यदि आपको हमारी पोस्ट सॉफ्टवेयर किसे कहते है। हिंदी में अच्छी लगी हो ओर आपको इससे कुछ सीखने का मिला हो तो हमे comments करके आप जरूर बताए।ओर इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ whatsapp group , facebook ओर अन्य social networks site's पर शेयर करे और इस जानकारी को अन्य लोगो तक पहुचाने में हमारी मदद करे।

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Monday, 6 September 2021

हेलो दोस्तों तो कैसे हैं, आप लोग। हमारे आर्टिकल पर आपका स्वागत है। हम आपको इस आर्टिकल में टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में बताने वाले हैं। यह क्या है, तथा यह कैसे कार्य करता है, और इससे होने वाले क्या फायदे हैं, तथा क्या नुकसान है।

दोस्तों टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम में सभी या प्रत्येक यूजर कंप्यूटर में उपयोग होने वाले संसाधनों को आपस में साझा करके उनका उपयोग करते हैं। इसमें एक ही कंप्यूटर का उपयोग कई सारे लोग एक साथ करते हैं।

अगर आप भी टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम किसे कहते हैं। इसके बारे में जानना चाहते हैं, तो आप हमारे साथ आखरी तक बने रहे। हम आपको टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम की पूरी जानकारी देंगे। तो चलिए अब बिना देर किए शुरू करते हैं। लेकिन इससे पहले हम जान लेते हैं, ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है।

ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है। (what is operating system in hindi)-

ऑपरेटिंग सिस्टम एक सिस्टम सॉफ्टवेयर होता है, जो कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का एक भाग होता है। जिसमें कंप्यूटर को बूट करते समय उसमें लोड किए गए प्रोग्राम शामिल होते हैं। यह कंप्यूटर में होने वाली प्रत्येक गतिविधि का प्रबंधन करता है। यह कंप्यूटर में किसी भी एप्लीकेशन को चलाने के लिए उपयोगी होते हैं। यह एप्लीकेशन प्रोग्राम और हार्डवेयर प्रोग्राम और सिस्टम के उपकरणों के बीच मध्यस्थता के रूप में कार्य करता है। अगर आसान शब्दों में कहा जाए तो ऑपरेटिंग सिस्टम में प्रोग्राम का एक बहुत बड़ा समूह होता है, जो कंप्यूटर सिस्टम की गतिविधियों को नियंत्रित करने का कार्य करता है।

अगर आपको ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है, यह और अच्छे से जानना है तो हमने इसके ऊपर भी पोस्ट लिख रखी है। जिसकी लिंक हम आपको यहां नीचे दे रहे है। जिस पर आप क्लिक करके ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में और अच्छे से जान पाओगे।

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है। (what is time sharing operating system in Hindi)-

Time sharing operating system वह सिस्टम है, जो एक से ज्यादा स्थानों पर उपस्थित यूजर के बीच में किसी एक कंप्यूटर को चलाने के लिए प्रबंधन करता है। यहां पर प्रत्येक यूज़र कंप्यूटर के संसाधनों को आपस में साझा करते है। टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम multiprogrammed operating system का ही एक रूप है। जो इंट्रक्टिव मोड में Quick Response Time के साथ कार्य करता है। अर्थात यहां प्रत्येक यूजर बारी-बारी से एक निश्चित समय के लिए कंप्यूटर के पार्ट्स या संसाधन जैसे- Memory, CPU आदि का उपयोग करते हैं। टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम प्रत्येक यूजर के लिए एक सामान क्रम में CPU शेयरिंग समय की एक समान मात्रा को एलोकेट करता है। यह एक से अधिक यूज़र के बीच में समय को बांटता है। अगर हम साधारण शब्दों में कहें तो वह ऑपरेटिंग सिस्टम जिसकी तकनीक का उपयोग करके बहुत सारे यूजर एक साथ केवल एक ही कंप्यूटर का उपयोग करते हैं, और एक से अधिक यूजर के बीच में समय को बाटता है, उसे टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम कहा जाता है। इस प्रकार का ऑपरेटिंग सिस्टम एक से ज्यादा उपयोगकर्ता के लिए होता है। तथा प्रत्येक उपयोगकर्ता के लिए एक निश्चित समय निर्धारित होता है।

ज्यादातर टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग विशेष प्रकार के mainframe computer में किया जाता है। क्योंकि इनमें बहुत सारी ऐसी जानकारियां होती है, जिनका उपयोग बहुत सारे यूजर्स करना चाहते हैं। इसलिए कई सारे यूजर्स telnet तकनीक का उपयोग करके दूर से ही इन कंप्यूटर को एक्सेस करते हैं, और अपने उपयोग के अनुसार टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग करते हैं।

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम कैसे कार्य करता है।-

Time sharing operating system मैं प्रत्येक यूज़र एक निश्चित समय के लिए ही एक्टिव (active) रहता है। सिस्टम बहुत ही कम समय में एक यूजर से दूसरे यूजर तक स्विच होता रहता है। प्रत्येक यूजर को कुछ समय मिलता है। इसमें जब एक यूजर सक्रिय या active होता है, तब बाकी के दूसरे यूज़र inactive मोड में रहते हैं। और इसे केवल मोड का यूजर ही उपयोग कर पाता है। तथा जब एक यूजर का समय अंतराल खत्म हो जाता है, या समय पूरा हो जाने पर पहले यूज़र का कंट्रोल बदलकर दूसरे के पास चला जाता है। और दूसरा यूज़र active हो जाता है। मतलब operating system पहले यूज़र के समय अंतराल खत्म होने के बाद दूसरे यूजर या उपयोगकर्ता को ले लेता है। जिससे पहले वाला यूजर Diactive हो जाता है। इस प्रक्रिया में एक यूजर का कंट्रोल बदलकर दूसरे यूजर के पास इतना जल्दी चला जाता है, कि उपयोग करने वाले यूजर को इस बात का पता भी नहीं चलता कि उसे कंप्यूटर के संसाधनों को किसी अन्य यूजर के साथ साझा करना पड़ रहा है। यहां CPU Scheduling और multiprogramming का उपयोग टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम में होता है।

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम के फायदे (advantage of time sharing operating system in hindi)-

(1) टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम के कारण बहुत सारे लोग एक साथ कंप्यूटर के संसाधनों का उपयोग कर पाते हैं।

(2) यह सभी यूजर को बारी-बारी से कंप्यूटर के संसाधनों का उपयोग करने के लिए सुविधा प्रदान करता है।

(3) यह बहुत ही कम समय में प्रतिक्रिया करता है।

(4) यूजर को इसका उपयोग करने में परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है।

(5) इसके उपयोग से कोई भी संगठन या कॉरपोरेट विभिन्न प्रकार की जानकारियों को साझा कर सकता है।

(6) इसमें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रोग्राम को संशोधित किया जा सकता है, और लिखा जा सकता है।

(7) यह एक साथ एक से अधिक एप्लीकेशन पर कार्य करता है।

(8) यह CPU को आइडल (idle) अवस्था में नहीं रहने देता है।

(9) इसमें एक समय में एक से ज्यादा यूजर कंप्यूटर का उपयोग कर सकते हैं।

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम के नुकसान (disadvantages of time sharing operating system in hindi)-

(1) इसमें बहुत सारे यूज़र एक ही समय में एक कंप्यूटर के संसाधनों का उपयोग करते हैं, तो उनके पर्सनल डाटा की सुरक्षा का लेकर खतरा होता है।

(2) इस ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्यशैली की विश्वसनीयता पर भरोसा करना थोड़ा मुश्किल है।

(3) इस ऑपरेटिंग सिस्टम को एक्सेस करने के लिए नेटवर्क कनेक्शन की आवश्यकता होती है। अगर नेटवर्क कनेक्शन नहीं होता है, तो यूजर द्वारा इसे एक्सेस नहीं किया जा सकता है।

(4) यहां डाटा के प्रभावी यातायात के लिए कारगर नहीं है।

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण (examples of time sharing operating system in hindi)-


(1) Unix - यह एक फेमस या बहुचर्चित टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम में जिसे नाम की कंपनी के द्वारा 1971 में बनाया गया था।

(2) OpenVMS - इसे 1976 में द्वारा बनाया गया था।

(3) Michign Terminal System - इसे 1959 में मिशीगन यूनिवर्सिटी द्वारा बनाया गया था।

(4) Multics - इसे 1969 में लांच किया गया था।

(5) Honey well CP-6  - इसे 1976 में कंपनी द्वारा बनाया गया था।
तो दोस्तों यह थी टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में जानकारी। हमें उम्मीद है, आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसंद आई होगी।

Conclusion -

आज इस पोस्ट में हमने आपको टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम किसे कहते है। ओर इसके उपयोग कहा किया जाता है। इसके बारे में आपको पूरी जानकारी दी है। में आशा करता हु की आप लोगो को time sharing operating system किसे कहते है। इसके बारे में अच्छे से समझ आया होगा। अगर यदि आपको अभी भी इस पोस्ट को लेकर कुछ डाउट्स है, तो आप हमे नीचे comments करके जरूर बताये।

ओर यदि आपको हमारी पोस्ट टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम किसे कहते है। हिंदी में अच्छी लगी हो ओर आपको इससे कुछ सीखने का मिला हो तो हमे comments करके जरूर बताए।ओर इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ whatsapp group , facebook ओर अन्य social networks site's पर शेयर करे और इस जानकारी को अन्य लोगो तक पहुचाने में हमारी मदद करे।

अभी के लिए बस इतना ही। हमारी इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। आपका दिन शुभ हो।

Wednesday, 1 September 2021

हेलो दोस्तों कैसे हैं, आप लोग। आज हम आपको कंप्यूटर से संबंधित सभी पार्ट्स के full from के बारे में बताने वाले हैं। दोस्तों जैसा कि हम सबको पता है,


आज का समय कंप्यूटर का समय है। आज हर कोई कंप्यूटर के बारे में जानकारी रखता है। लेकिन दोस्तों कंप्यूटर केवल एक ऐसा पार्ट्स या डिवाइस नहीं है, जो सब काम अकेला करता है। यह विभिन्न प्रकार के parts से मिलकर बना होता है। और यह सब पार्ट्स आपस में मिलकर कार्य करते हैं।

दोस्तों आज के समय में सरकारी नौकरी पाना हर किसी का सपना होता है। और इन सरकारी नौकरी के लिए हमें competitive exam देना होती हैं। इन कॉन्पिटिटिव एग्जाम में कंप्यूटर से संबंधित question को अकसर पूछे ही जाते है। इन exam में कंप्यूटर से सम्बंधित question का प्रचलन दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। कोई सी भी एग्जाम हो उनमें कंप्यूटर से संबंधित क्वेश्चन आते ही हैं। और इनमें भी कंप्यूटर के पार्ट्स के full from से संबंधित question ज्यादातर पूछे जाते हैं।

कंप्यूटर से संबंधित parts बहुत सारे होते हैं। और parts का किसी भी एक जगह पर जानकारी होना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन दोस्तों आज हम आपको यहां पर कंप्यूटर से जुड़े सभी छोटे-बड़े पार्ट्स की full from के बारे में बताएंगे। हम आपकों यहां पर कंप्यूटर के 140 से अधिक full from के बारे में जानकारी देंगे। अगर आप भी कंप्यूटर से जुड़े parts के full from के बारे में जानना चाहते हैं, तो आप हमारे साथ आखरी तक बने रहें। लेकिन इससे पहले हम जान लेते हैं, कंप्यूटर क्या है। तो चलिए अब बिना देर किए शुरू करते हैं।

कंप्यूटर क्या है। (what is computer in Hindi)-

दोस्तों हम सबको पता है, कंप्यूटर का आविष्कार "चार्ल्स बैबेज" ने किया था। यह एक इलेक्ट्रॉनिक डाटा प्रोसेसिंग उपकरण है, जो हमारे द्वारा दिए गए डाटा को इनपुट के रूप में लेता है। और फिर वह उस डाटा पर प्रोसेस करके हमें उसका परिणाम आउटपुट के रूप में प्रदान करता है। कंप्यूटर की सहायता से हम बड़ी से बड़ी कैलकुलेशन को आसानी से हल कर सकते हैं। कंप्यूटर के वह पार्ट्स जिन्हें हम छू सकते हैं, उन्हें हार्डवेयर कहते हैं। तथा कंप्यूटर के वह पार्ट्स जिन्हें हम छू नहीं सकते हैं, उन्हें सॉफ्टवेयर कहा जाता है।

कंप्यूटर का full from -

जो लोग कंप्यूटर का उपयोग करते हैं वह तो कंप्यूटर के फुल फॉर्म के बारे में जानते हैं। तथा जो उपयोग नहीं करते हैं, उन्हें भी इसके full from के बारे में जानकारी होती हैं। लेकिन कुछ लोग होते हैं, जिन्हें इसके full from के बारे में पता नहीं होता है। हम यहां पर आपको इसके full from के बारे में बता रहे हैं।

C - Commonly           (आम तौर पर)

O - Operation            (संचालित)

M - Machine             (मशीन)

P - Particularly         (विशेष रूप से)

U - Used for              (प्रयुक्त)

T - Technical            (तकनीकी)

E - Educational        (शैक्षणिक)

R - Research            (अनुसंधान)

कंप्यूटर parts full from क्यों याद रखे। -

दोस्तों हम सबको पता है, आज के समय में कंप्यूटर का उपयोग हर जगह पर किया जाता है। इसलिए यह कितना ज्यादा इंर्पोटट है, यह हम सब जानते हैं। आज कोई सी भी एग्जाम हो वहां पर कंप्यूटर से संबंधित प्रश्न पूछे ही जाते हैं। कंप्यूटर के केवल 3, 4 parts ही नहीं है, जिन्हें हम याद रख सके। यह विभिन्न पार्ट्स से मिलकर बना है। तथा इससे संबंधित उपयोग आने वाले बहुत सारे पार्ट्स होते हैं। और आजकल तो एग्जाम में कंप्यूटर से संबंधित पार्ट्स के full from वाले questions का प्रचलन बहुत ज्यादा बढ़ गया है, इसलिए हमें कंप्यूटर से जुड़े सभी पार्ट्स के full from बारे में पता होना चाहिए। हम आपको यहां पर कंप्यूटर से संबंधित parts के full from के बारे में बता रहे हैं।

कंप्यूटर पार्ट्स फुल फॉर्म -

हम सब जानते हैं, कंप्यूटर को चलाने के लिए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की सहायता ली जाती है। इन हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के भी बहुत सारे पार्ट्स होते हैं, जिनके बारे में हमें पता होना चाहिए। हम आपको यहां पर इन्ही parts से संबंधित फुल फॉर्म (full from) बता रहे हैं।

PC - Personal Computer

CPU - Central Processing Unit


ROM - Read Only Memory

RAM - Random Access Memory

FAT - File Allocation Table

TXT - Text
UPS - Uninterruptible Power Supply

NTFC - New Technology File System

DOC - Document

LED - Light Emitting Diode

LCD - Liquid Crystal Display

DEL - Delete

DB - Data Base

CD - Compact Disc

DVD - Digital Versatile Disc

MS - Microsoft

SD - Secure Digital

BRD - Bs : BLU-RAY-Disc

MMC - Multi Media Card

ISO - International Organization For Standardization

NUM LOCK - Number Lock

Prnt Scrn - Print Screen

SYSRQ - System Request

FN - Function

CMD - Command 

WMP - Windows Media Player

TEMP - Temporary

Ins - Insert

ScrLk - Scroll Lock

WINXP - Windows XP 

WIN 7 - Windows 7

SP - Service Pack

PgDn - Page Down

PgUp - Page Up

MP3 - Moving Picture Experts Group Phase3 
           (MPEG-3)

MPEG - Moving Picture Experts Group Phase (MPEG)

PRO - Professional

BAT - Batch

JPG - Joint Photographic Experts Group

REGE DIT - Registry Editor 


HTTPS - Hyper Text Transfer Protocol Secure

HTTP - Hyper Text Transfer Protocol

OSK - On-Screen Keyboard

COM - Component Object Model

IT - Information Technology

DNS - Domain Name System

USB - Universal Serial Bus

GPEDIT - Group Policy Editor

SEO - Search Engine Optimization

CEO - Chief Executive Officer

SMS - Short Message Service

MMS - Multimedia Message Service

E-MAIL - Electronic Mail

AP - Alertpay

MB - Money Bookers

PP - Paypal

PW - PASS - P.CODE - CODE ÷ Password

IBM - International Business Machines.

AVI - Audio Video Interleave

RGB - Red Green Blue
GIF - Graphics Interchange Format

WMV - Windows Media Video

APM - Advanced Power Management

ACPI - Advanced Configuration And Power Interface

CMYK - Cyan - Magenta - Yellow Key (Black)

SYS - System 

IC - Integrated Circuit

CONFIG - Configuration

CTRL - Control

NET - Internet

ALT - Alternate

AP - Access Point 

IP - Internet Protocol

TLD - Top - Level Domain

UL - Upload

DL - Download

ESC - Escape

PR - Page Rank

INFO - Information


WLAN - Wireless Local Area Network

LR - Liberty Reserve

IDM - Internet Download Manager

NAT - Network Address Translation

UP DATE - Up-to-Date

DAP - Download Accelerator Plus

KB - Kilo byte

MB - Mega byte

GB - Giga byte

GiB - Gibi byte

TB - Tera byte

TiB - Tebi byte

PB - Peta byte

PiB - Pebi byte

EB - Exa byte

EiB - Exbi byte

ZB - Zetta byte

ZiB - Zebi byte

YB - Yotta byte

YiB - Yobi byte

HP - Hewlett Packard

LG - Life's Good

INTEL - Integrated Electronics

IPV4 - Internet Protocol Version 4

IPV6 - Internet Protocol Version 6

WIFI - Wireless Fidelity

ATM - Automated Teller Machine

OTG - ON-The-GO

VPN - Virtual Private Network

PDF - Portable Document Format


A\D - Anolog to Digital

ASIC - Application Specific Integration Cricuit

ALGOL - Algorithmic Language

ALU - Arithmetic Logic Unit

TURN Off - Shutdown

REBOOT - Restart

FLASH DRIVE - Thumb drive, Pendrive, USB                                       drive

LOGIN - Login , Log ON

GIF - Graphics Interface Format

HTML - Hyper Text  Markup  Language

PHP - Hyper Text  Preprocessor

XML - Extensible Markup  Language

CSS - Cascading Style Sheets

ASP - Active Server  Pages

SQL - Structured Query Language

EDV- Educationl

.NET - Network

.govt - Government

.INFO - Information

3G - 3rd Generation

TCP - Transfer Control Protocol

4G - 4th Generation

VIRUS - Vital Information Resource Under Seized

GSM - Global System For  Mobile Communication

CDMA - Code Division Multiple Access

VHF - Very High Frequency

WAP - Wireless Application Protocol

UHF - Ultra High Frequency

HP - Hewlett Packard

PNG - Portable Network Graphics

3GP - 3rd Generation Project

MP4 - MPEG-4 Video File

EEPROM - Electrically EPROM

HDD - Hard Disk Drive

FDD - Floppy Disk Drive

KBD - Keyboard

BIOS - Basic Input Output System

VDU - Visible Display Unit 
यह थे कंप्यूटर से संबंधित पार्ट्स के फुल फ्रॉम दोस्तों हमने आपको यहां पर कंप्यूटर से जुड़े अधिक से अधिक पार्ट्स के बारे में जानकारी देने की कोशिश की है मुझे उम्मीद है आपको हमारे द्वारा बताई गई जानकारी पसंद आई होगी। 

Conclusion -

हमने आपको आज कंप्यूटर से सम्बन्धित parts के full from  के बारे में पूरी जानकारी दी है। मुझे उम्मीद है, आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसंद आई होगी। और अगर आपको अभी भी इस पोस्ट में कुछ dout's लगे तो आप हमें कमेंट करके जरूर बताएं। 


और अगर आपको हमारी पोस्ट कंप्यूटर से संबंधित पार्ट्स full from। हिंदी में अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ WhatsApp group, Facebook और Social Media Site's पर शेयर करें और इस जानकारी को अन्य लोगों तक पहुंचाने में हमारी मदद करें। 


अभी के लिए बस इतना ही, मिलते हैं अगली पोस्ट में। एक और नई जानकारी के साथ। हमारी पोस्ट पढ़ने के लिए धन्यवाद। आपका दिन शुभ हो।