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Sunday, 7 June 2020

हार्ड डिस्क किसे कहते है। यह कितने प्रकार की होती है। in hindi.

हैलो दोस्तों तो कैसे है, आप लोग। आज हम इस पोस्ट में हार्ड डिस्क के बारे में जानेंगे। यह क्या है, कितने प्रकार की होती है, तथा इसके क्या-क्या कार्य है। अगर आप हार्ड डिस्क के बारे में पहले से जानते हैं तो यह आपके लिए बहुत अच्छी बात है। अगर नहीं जानते हैं तो आप निराश ना हो। आज हम आपको हार्ड डिस्क के बारे में जानकारी देंगे। हार्ड डिस्क को अक्सर Disk Drive या Hard Disk Drive (HHD) भी कहा जाता है
जिस तरह से किसी घर में कपड़ों को संभालने के लिए अलमारी की आवश्यकता होती है। या किताबों के कलेक्शन को संभालने के लिए लाइब्रेरी की आवश्यकता होती है उसी तरह कंप्यूटर को भी अपना डाटा स्टोर करने के लिए एक ऐसी जगह की आवश्यकता होती है जिसमें वह digital data को स्टोर कर पाए। डिजिटल दाता या सामग्री से तात्पर्य (डॉक्यूमेंट,फोटो,वीडियो,इमेज, सॉफ्टवेयर प्रोग्राम,ऑपरेटिंग सिस्टम आदि) को कंप्यूटर में स्टोर करने के लिए तथा उसे प्रोसेस करने के लिए कंप्यूटर में दो तरह की स्टोरेज डिवाइस का उपयोग किया जाता है जिसमें हार्ड डिस्क भी है जिसे हम दृतियक मेमोरी डिवाइस या सेकेंडरी मेमोरी डिवाइस भी कहते हैं। इसमें डाटा को स्थायी रूप से संग्रहित किया जाता है।

हार्ड डिस्क क्या है (What is Hard Disk in hindi)-

हार्ड डिस्क एक सेकंडरी मेमोरी डिवाइस है। जिसमे डेटा को स्थायी तोर पर स्टोरेज होता है। यह मानव मस्तिष्क के समान है जहाँ पर सभी वर्तमान और अतीत की घटनाएं संग्रहित होती है। यह मेग्नेटिक मटेरियल से बना होता है। जो magnetic Recording Techniques का पालन करके डेटा को संग्रहित करता है।
हार्ड डिस्क को कंप्यूटर के महत्वपूर्ण घटक के रूप में देखा जाता है। क्यो की इसके बिना कोई भी कंप्यूटर काम नही करेगा। हार्ड डिस्क का प्रमुख कार्य कंप्यूटर डेटा को स्थाई रूप से संग्रहित करना तथा उसे पुनः प्राप्त करना होता है। हार्डडिस्क डेटा को permanently स्टोर करती है। यह एक non-volatile memory डिवाइस है। non-volatile memory डिवाइस उन्हें कहा जाता है जहाँ पर डेटा को लंबे समय तक स्टोर करके रखा जा सकता है। अर्थात यहाँ power off होने पर भी डेटा सुरक्षित रहता है।

हार्ड डिस्क को सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस भी कहा जाता है। यह कंप्यूटर केस (CPU) के अंदर मौजूद रहती है। जो डेटा केबल (Data cubles) का उपयोग करके computer motherboard से जुड़ी रहती है। इसे Electro mechanical data storage device भी कहा जाता है। क्यों कि यह डिजिटल जानकारी को संग्रहित करने और उसे पुनः प्राप्त करने के लिए चुंबकीय भंडारण का उपयोग करती है।
 सबसे पहला हार्ड डिस्क की IBM कंपनी द्वारा बनाया गया था। जिसकी स्टोरेज क्षमता महज 5 MB थी ओर उसका वजन 250 kg था। RAMAC (Random Access Method Of A Accounting And Control) पहली हार्ड डिस्क थी। हार्ड डिस्क में डाटा को स्टोर करने के लिए एक या एक से अधिक गोल घूमने वाली डिस्क लगी होती है। तथा प्रत्येक डिस्क या प्लेटर(Platter) में एक बहुत पतली पट्टी होती है। जो चुंबकीय सामग्री के इस्तेमाल से बनाई जाती है। हार्ड डिस्क एक गोलाकार डिस्क होती है जिस पर Digitally डाटा सेव होता है। हार्ड डिस्क बहुत तेजी से घूमती है जिस की स्पीड को हम RPM(Revolutions per minute) में मापते हैं। यानी 1 मिनट में कितने चक्कर लगाए गए। जितना ज्यादा RPM होगा उतनी ही ज्यादा डाटा Read और Write करने की स्पीड होती है। अधिकतर हार्ड डिस्क 5400 से 7200 RPM की होती है

हार्ड डिस्क के प्रकार -

विभिन्न प्रकार की हार्ड डिस्क में डाटा को ट्रांसफर और डाटा को भंडारण करने की अवधि अलग-अलग होती है इसके आधार पर हम हार्ड डिस्क को दो भागों में बांट सकते हैं
● PATA Drives  ● SATA Drives

● PATA Drives (parallel Advanced Technology Attachment) - यह सबसे पुराने प्रकार की हार्डडिस्क है। यह मध्यम गति की हार्ड डिस्क है। जिसका डाटा ट्रांसफर रेट 133mb प्रति सेकेंड तक है। PATA हार्ड डिस्क के कंप्यूटर से जुड़ने के लिए ATA Interface Standard का उपयोग करती है। ये ड्राइव magnetism के इस्तेमाल से डाटा स्टोर करती है।

● SATA Drives (Serial Advanced Technology Attachment) - आजकल के कंप्यूटर और लैपटॉप में इस प्रकार की हार्ड डिस्क का ज्यादातर उपयोग किया जाता है SATA cable's काफी पतली ओर लचीली होती है। जो PATA के मुकाबले काफी बेहतर होती है। इसका data transfer rate PATA से काफी बेहतर होता है।

हार्ड डिस्क के प्रमुख घटक -

● READ/WRITE HEAD - यह एक छोटा सा चुंबक होता है जो सूचनाओं को रिकॉर्ड तथा स्टोर करने का कार्य करता है। जो रीड राइट आर्म के आगे लगा होता है।

● SPINDLE - यह एक प्रकार की मोटर होती है जो प्लैटर के बीच मौजूद रहती है इसकी मदद से प्लैटर घूमते रहते हैं।

● ACTUATOR - इसकी मदद से इसकी मदद से Read Write आर्म घूमते हैं।

● READ-WRITE ARM - Read Write Head का पिछला हिस्सा होते हैं जो यह दोनों आपस में जुड़े होते हैं।

● CONNECTOR - यह सर्किट बोर्ड से रीड-राइट और प्लैटर तक डाटा पहुंचाता है।

● LOGIC BOARD - एक प्रकार की चिप होती है। जो Input ओर Output की सभी जानकारियों को नियंत्रित करती है।

● MAGNETIC PLATTERS - यह एक महत्वपूर्ण भाग है जिसमें डिजिटल इंफॉर्मेशन को चुंबकीय रूप से स्टोर किया जाता है। इसमें डाटा बाइनरी फ्रॉम (0 से 1) में सेव रहता है।
इनके अलावा भी हार्ड डिस्क के कई पार्ट्स होते है।

हार्ड डिस्क कंप्यूटर सिस्टम से किस प्रकार जुड़ा होता है। इसके आधार पर यब दो प्रकार का होता है।
● Internal Hard Disk Drive
● External Hard Disk Drive

हार्ड डिस्क के कार्य -

हार्ड डिस्क को permanent storage device भी कहा जाता है। एक हार्ड डिस्क का मुख्य कार्य कंप्यूटर में डाटा को संग्रहित करना होता है। यह डाटा कई प्रकार का हो सकता है जैसे सॉफ्टवेयर ,डॉक्यूमेंट, फाइल ,ऑपरेटिंग सिस्टम आदि। इन हार्ड डिस्क में कितना डाटा स्टोर हो सकता है यह हार्ड डिस्क की storage capacity पर निर्भर करता है। आपको ऐसी हार्ड डिस्क मार्केट में मिल जाएगी जिनकी स्टोरेज क्षमता gigabytes से लेकर terabytes तक होती है।

हार्ड डिस्क धीमी क्यू हो जाती है। -

आपने अधिकतर देखा होगा कि आपका कंप्यूटर slow या धीमा हो जाता है। आपके कंप्यूटर का स्लो होने का मेन कारण आपकी हार्ड डिस्क होता है। तथा हार्ड डिस्क स्लो होने का सबसे बड़ा कारण इसके डाटा डिस आर्डर तरीके से सेव हो जाता है। जब HDD में डाटा बहुत अधिक हो जाता है तब इसे खोजने में अधिक समय लगता है। इसी वजह से हार्ड डिस्क स्लो या धीमी हो जाती है। और आपको हार्ड डिस्क को तेज करने के लिए विंडोज डिस्क डीफ्रेग्मेटेंशन टूल defragment करने की आवश्यकता होती है। यह हार्ड डिस्क में डाटा को एक तरह से व्यवस्थित कर देता है। इस तरह से हार्ड डिस्क का स्पेस भी बढ़ जाता है। हमें हार्ड डिस्क को सप्ताह में या महीने में एक बार जरूर Disk Defragmenting के जरिए मेंटेन करना चाहिए।

SSD क्या है। -

SSD को Solid State Drive के नाम से जाना जाता है। इसे हम HDD (Hard Disc Drive) का replacement  भी कह सकते है। इसमें डाटा को स्टोरेज करने के लिए Flash Memory का उपयोग होता है। यह एक नॉन-वोलेटाइल स्टोरेज डिवाइस है। इसमें एक माइक्रोचिप लगी होती है जो मेमोरी कार्ड तथा पेन ड्राइव की तरह काम करती है। इसमें कोई मूविंग पार्ट नहीं होता है। इसके विपरीत हार्ड डिस्क ड्राइव में एक Mechanical Arm का इस्तेमाल होता है। जो डाटा को Read/Write करने के साथ-साथ Storage Platter के चारों ओर घूमता है। और Storage Paltter डाटा को खोज कर हमें देता है।

SSD के लाभ व हानि -

● यह कम बिजली का उपयोग करती है।
● यह ज्यादा टिकाऊपन होती है।
● छोटे आकार की होती है। तथा इसका वजन हल्का होता है।
● इसकी स्पीड 500 mbps होती है।
● यह थोड़ी महंगी होती है। इसकी भंडारण क्षमता कम होती है। तथा इसकी स्टोरेज capacity कम होती है।
● यह performance में HHD से बढ़िया होती है।
हार्ड डिस्क के बारे में जानने के बाद हम इसकी निर्माता कंपनियों के बारे में जान लेते हैं।

हार्ड डिस्क निर्माता कंपनियां (Manufacturers of Hard Disk Drive) -

● Western Digital
● Toshiba
● Fujitsa
● Iomega
● Seagata Technology
● Hitachi Global Storage
● Quantum
● Samsung Electronics
● G - Technology
● EMC Corporation

Conclusion -

आज इस पोस्ट में हमने आपको हार्ड डिस्क किसे कहते है। तथा यह कितने प्रकार के होते  है। इसके बारे में आपको पूरी जानकारी दी है। में आशा करता हु की आप लोगो को हार्ड डिस्क किसे कहते है। इसके बारे में अच्छे से समझ आया होगा। अगर यदि आपको अभी भी इस पोस्ट को लेकर कुछ डाउट्स है या आप हमारी इस पोस्ट से असंतुष्ट है। या फिर हमारी इस पोस्ट में कुछ सुधार करने की जरूरत है या इस पोस्ट से जुड़ा कोई भी सवाल आपके मन मे है तो आप हमे नीचे comments करके जरूर बताये।

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अभी के लिए बस इतना ही। हमारी इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। आपका दिन शुभ हो।


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