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Monday, 23 March 2020

Protocol क्या है। और ये कितने प्रकार के होते है।

हेलो दोस्तों तो कैसे है, आप लोग। आज की हमारी इस पोस्ट में आपका स्वागत है। आज हम प्रोटोकाल के बारे में जानेंगे। जैसा Networking में प्रोटोकॉल क्या है। इसका क्या उपयोग कहां किया जाता है। और यह कितने प्रकार के होते हैं। प्रोटोकॉल का हिंदी में अर्थ होता है "नियम समूह' यानी किसी चीज को किए जाने के लिए बनाए गए नियम। उदाहरण के लिए अगर आप सड़क का उपयोग आने जाने के लिए करते हैं। आप हमेशा सड़क के वाली बाई ओर से चलते हैं तथा उसी रास्ते पर वापस आने के लिए दायीं और के रास्ते पर चलते हैं। यदि आपको बीच में किसी चौराहे पर लाल सिग्नल दिख जाता है तो आप अपनी गाड़ी को तुरंत वहां पर रोक देते है। मतलब आप ट्रैफिक नियम का पालन कर रहे हैं। ये यातायात द्वारा बनाए गए नियम होते हैं जिनका उपयोग ट्रैफिक और यातायात को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है। और हम इन नियमों का रोज पालन करते हैं।
ठीक उसी प्रकार इंटरनेट की दुनिया में डिजिटल कम्युनिकेशन में जब डेटा को transfer किया जाता है तो उन्हें कंट्रोल करने के लिए कुछ नियम बनाए गए जिन्हें Network protocol कहा जाता हैं।यह नियम internet पर इस लिए बनाए जाते है ताकि जब डेटा को इंटरनेट की दुनिया मे Network के भीतर transfer किया जाए तो वह systematic तरीके से transfer हो सके। देखा जाए तो protocol के कई प्रकार के होते हैं। और सब protocol का अपना-अपना अहम रोल होता है। आज हम इस पोस्ट में आपको protocol के बारे में जानकारी देंगे। ताकि आपको अच्छे से पता चल जाए protocol का उपयोग कहा और कैसे किया जाता है। लेकिन इसके लिए आपको हमारी इस पोस्ट को शुरू से अंत तक पूरा पड़ना  होगा। तभी आप भी protocol के बारे में अच्छे से जान पाएंगे। इसलिए आप इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहिए। तो चलिए अब बिना देर किए शुरू करते हैं। protocol क्या है।

Protocol क्या है।(what is protocol in hindi) -

protocol kya hai in hindi
Protocol एक तरह से "set of rules" होता है।जिनका उपयोग digital communication में इस्तेमाल करने के लिए किया जाता है। अगर हम अपने शब्दों ने कहे तो protocol एक digital भाषा है। जिसके माध्यम से हम इंटरनेट पर दूसरे से संवाद करते है। यह दो नेटवर्किंग डिवाइस के बीच बने कम्युनिकेशन नियम होते हैं। इन नियमों के अनुसार नेटवर्किंग डिवाइस आपस में कम्युनिकेट कर पाते हैं। computing में प्रोटोकॉल को डिजिटल लैंग्वेज भी कहा जाता है। आपने HTTP का नाम तो सुना ही होगा। इस प्रोटोकॉल के जरिए एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस को या एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर को text कि फॉर्म में कुछ डाटा भेजता है। और उसे रिसीव करने वाला कंप्यूटर या डिवाइस उस डेटा को समझता है और उसे हमारे पढ़ने योग्य भाषा में परिवर्तित करता है। जिससे हम उस डेटा को पढ़ पाते हैं। इंटरनेट पर हमारे द्वारा भेजी गई कोई file अथवा mail इसी इंटरनेट प्रोटोकॉल के अनुसार कार्य करती है। "प्रोटोकॉल का उपयोग एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर तक कुछ डेटा भेजने के लिए करते है। जो डेटा games, video, image, decoument कुछ भी हो सकता है।
protocol kya hai
protocol उन डिवाइस के बीच peer to peer connection बना लेता है जिनको आपस मे डेटा transfer करना होता है। इस peer to peer connection के कारण ही डिवाइस इतने अच्छे से आपस मे कम्युनिकेट कर पाते है। हम बिना protocol के इंटरनेट का उपयोग भी नही कर सकते है।

उदाहरण के लिए यदि आप अपने किसी friend को mail करना चाहते हैं। तो आपके दोस्त को ही जाएगा किसी दूसरे व्यक्ति के पास नहीं जाएगा। क्योंकि इसके पीछे set of rules या protocol काम कर रहा होता है। जो अपनी इंफॉर्मेशन को सही जगह पर पहुंचाने का काम करता है। अगर इंटरनेट प्रोटोकाल नहीं होता तो इसकी कोई गारंटी नहीं कि आपने जो mail आपके दोस्तों को भेजा है वह उसे ही पहुंचेगा। बिना प्रोटोकॉल के वह किसी दूसरे व्यक्ति को भी पहुंच सकता है। तो हम कुल मिलाकर कहें तो एक प्रोटोकॉल डेटा कम्युनिकेशन करने के लिए नियमों और निर्देशों का एक समूह होता है।
प्रोटोकॉल कई प्रकार के होते हैं। इसलिए इन्हें अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है। कुछ प्रोटोकॉल transmission process पर पूरी जानकारी प्रदान करते है। तो कुछ प्रोटोकॉल communication standards को निर्दिष्ट करते है। अब आप प्रोटोकॉल के बारे में जान चुके है। अब हम इसके प्रकार के बारे में जानेंगे।

Protocol के प्रकार (Types of protocol in hindi) -

वैसे तो प्रोटोकॉल बहुत प्रकार के होते हैं। इंटरनेट के माध्यम से कई बार प्रकार का डाटा तो त्वरित होता है। इसलिए विभिन्न प्रकार के डेटा के लिए विभिन्न-विभिन्न इंटरनेट प्रोटोकॉल विकसित किए गए हैं। विभिन्न प्रकार के नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर के बीच संचार प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए कई प्रकार के डिजिटल लैंग्वेज का उपयोग करते हैं। जिनके द्वारा केवल विशेष प्रकार का ही डेटा संचारित किया जाता है। हम यहाँ नीचे आपको कुछ महत्वपूर्ण इंटरनेट प्रोटोकॉल के बारे में जानकारी देंगे।

(1) TCP (Transmission control protocol) -
TCP protocol kya hai
यह एक इंटरनेट कम्युनिकेशन प्रोटोकोल है। इसके बिना इंटरनेट में किसी भी तरह का संचार संभव नहीं है। इसका उपयोग नेटवर्क पर डेटा को एक जगह से दूसरी जगह पर भेजने के लिए किया जाता है। यह प्रोटोकॉल दो डिवाइस के मध्य कनेक्शन को स्थापित करने और डेटा को आदान-प्रदान करने की अनुमति प्रदान करता है। यह अपने कार्य को IP protocol के साथ मिलकर करते हैं। जो प्रत्येक कंप्यूटर के लिए एक विशिष्ट नाम (IP Address) निर्धारित करता है।TCP में डाटा को छोटे-छोटे पैकेट में तोड़ दिया जाता है। और फिर लक्ष्य पर भेजा जाता है। यह उनकी डिलीवरी की गारंटी देता है। कि पैकेट को उसी क्रम में वितरित किए जाएंगे जिसमें उन्हें भेजा गया था। अगर डिलीवरी या ट्रांसफर के वक्त कोई पैकेट खो जाता है तो TCP के पास regeneration request भेज कर उस पैकेट को वापस लाने की क्षमता होती है।

(2) FTP (File Transfer Protocol) -
FTP protocol kya hai
इस प्रोटोकॉल का उपयोग एक कंप्यूटर सिस्टम से दूसरे कंप्यूटर सिस्टम में फाइल ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। जिसके लिए एक खास सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाता है। क्लाईंट कहते हैं। इस प्रोटोकॉल का उपयोग सबसे अधिक वेब पर सर्वर और वेब पेज को अपलोड करने में किया जाता है। नेटवर्क पर जितनी भी फाइल एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर होती है वह सब FTP protocol के जरिए ही होती है। इस प्रोटोकॉल का उपयोग ज्यादातर वेब डेवेलपर्स करते हैं। ताकि इसके द्वारा मल्टीमीडिया से लेकर साधारण टेक्स्ट फाइल आसानी से और तेज गति से अपलोड व डाऊनलोड की जा सके।

(3) IP Protocol (Internet protocol) -
internet protocol kya hai
इस प्रोटोकॉल को 1970 में विकसित किया गया था। इंटरनेट प्रोटोकॉल के जरिए इंटरनेट पर एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में डाटा ट्रांसफर किया जाता है। इंटरनेट पर हर कंप्यूटर का अपना-अपन IP address होता है। जब हम किसी डाटा को एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में भेजते हैं तो वह कई पैकेट्स में विभाजित हो जाता है। और जब तक यह पैकेट्स अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच जाते तब तक यह IP address पैकेट को रूट करते हुए विभिन्न नोड्स और नेटवर्क को दिखाते हैं। तथा प्रत्येक पैकेट में sender और receiver के Ip address लगे होते हैं। जो इसे सही जगह पर पहुंचने में मदद करते हैं।

(4)  HTTP (Hyper Text Transfer Protocol) -
http protocol kya hai
Http protocol वर्ल्डवाइड वेब में webpage को transfer करने के लिए बनाए गये इन नियमों का एक समूह होता है। मतलब http वेबपेजो को वेब ब्राउज़र में दिखाने के लिए वेब सर्वर द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाला प्रोटोकॉल है। उदाहरण के लिए आप अपने वेब ब्राउज़र पर जाकर एड्रेस बार में जाकर देखेंगे तो आपके एड्रेस बार के सामने "http;// या "https://" दिख रहा है। यहां पर अगर आप देखेंगे तो आपका http://pcwali.com  दिख रहा होगा। यहां पर http:// इंटरनेट प्रोटोकॉल है तथा pcwali.com डोमेन नाम है। http प्रोटोकॉल के आधार पर वेब ब्राउज़र पता लगाता है कि डाटा के साथ कैसा व्यवहार करना है। जब हम वेब ब्राउज़र का इस्तेमाल करके किसी वेबपेज की रिक्वेस्ट करते हैं तो http protocol ही उसे वेब पेज पर लाने का कार्य करता है। यह एक application protocol है जो TCP//P  प्रोटोकोल के शीर्ष पर चलता है। आजकल http  का सुरक्षित संस्करण https का इस्तेमाल होता है जिसका पूरा नाम http secure होता है।

(5) SMTP (Simple mail Transfer Protocol) -

SMTP एक बहुत ज्यादा लोकप्रिय ई-मेल प्रोटोकाल है। जिसका उपयोग ई-मेल भेजने के लिए किया जाता है। इस प्रोटोकॉल के द्वारा एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर पर ईमेल भेजने के लिए नियमों का निर्धारण किया जाता है। जिनके आधार पर ही ईमेल भेजे जाते हैं। यह प्रोटोकॉल IMAP से भी ज्यादा उपयोग होने वाला है।
(6) POP3 (Post Office Protocol version 3) -

इस प्रोटोकॉल का उपयोग ई-मेल प्राप्त करने के लिए किया जाता है। पहले इसका pop वर्जन था। लेकिन अभी इस प्रोटोकॉल का pop3 मतलब तीसरा वर्जन प्रचलन में है। जो ई-मेल प्राप्त करने के लिए एक मानक प्रोटोकॉल बन चुका है।

(7) IMAP (Internet Massage Access Protocol)-

यह प्रोटोकॉल हमारे सभी mails को मेल सर्वर में स्टोर करने का कार्य करता है। यह प्रोटोकॉल रिमोट मेल सर्वर की तरह कार्य करता है। कुछ लोग इसे Instant Message Access Protocol भी कहते हैं। लेकिन यह बिल्कुल गलत है  यह प्रोटोकॉल जब हम अपनी mail id और पासवर्ड डालकर login करते हैं तो यह हमें अपनी mail को एक्सेस करने में मदद करता है।

(8) UDP (User Datagram Protocol) -

UDP protocol  का इस्तेमाल भी TCP की तरह ही किया जाता है। इसके द्वारा Low-Latency तथा  Loss-Tolerating कनेक्शन बनाए जाते हैं। इन प्रोटोकॉल में capability नहीं होती है। यह Small Size के डाटा पैकेट्स को transmit करने के काम में आता है। इन कम साइज के डाटा पैकेट को Datagram कहा जाता है। यह इंटरनेट प्रोटोकॉल के ऊपर काम करते हैं। इसमें अगर कोई डाटा पैकेट स्थानांतरण के दौरान खो जाता है तो उसे regenerate करने की क्षमता नहीं होती है।

(9) Ethernet -

इथरनेट LAN Communication के लिए उपयोग किए जाने वाला सबसे लोकप्रिय प्रोटोकॉल है। इथरनेट डेटा को डिजिटल पैकेट में प्रसारित करता है। यदि कंप्यूटर इस प्रोटोकॉल का उपयोग करना चाहता है तो उसके पास इथरनेट इंटरफेस कार्ड (NIC) का होना जरूरी होता है। यह प्रोटोकॉल तय करता है कि नेटवर्क डिवाइस पर एक दूसरे से किस प्रकार कम्युनिकेट करेंगे। ताकि अन्य डिवाइस डेटा को पहचान सके। उन्हें प्राप्त कर सके और प्रोसेस कर सके।

(10) Telnet -
Telnet नियमों का एक ऐसा सेट होता है। जिसका उपयोग एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर को जोड़ने के लिए किया जाता है। इस प्रोटोकॉल का इस्तेमाल वर्चुअल कंप्यूटरो को मैनेज करने के लिए किया जाता है। इसके द्वारा रिमोट कंप्यूटर पर कार्य करने की सुविधा मुहैया कराई जाती है। ताकि एक यूजर रिमोट सिस्टम पर लोकल सिस्टम की भांति कार्य कर सकें।

Protocol के उपयोग -

प्रोटोकॉल कई प्रकार के होते हैं और सभी के काम करने का तरीका अलग-अलग होता है। इसलिए जरूरत के अनुसार अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग प्रकार के प्रोटोकॉल उपयोग किए जाते हैं।

(1) प्रोटोकॉल यह निर्धारण करता है कि नेटवर्क में दो डिवाइस आपस में कैसे जुड़ेंगे।

(2) प्रोटोकॉल के द्वारा ट्रांसफर का method तय किया जाता है।

(3) प्रोटोकॉल डेटा का स्ट्रक्चर या फॉरमैट निर्धारित करता है।

(4) प्रोटोकॉल के द्वारा transmission की स्पीड तय की जाती है।

(5) प्रोटोकॉल के द्वारा किसी एरर के आने पर उसे मैनेज करना होता है।

(6) प्रोटोकॉल द्वारा डेटा को सही जगह पर ले जाना होता है।

(7) प्रोटोकॉल के द्वारा डेटा एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में transfer किया जाता है।

Protocol कैसे काम करता है। -

कंप्यूटर के बीच कम्युनिकेशन के लिए हमें प्रोटोकॉल टेक्नोलॉजी की आवश्यकता पड़ती है। उदाहरण के लिए अगर हम एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में फाइल ट्रांसफर करना चाहते हैं तो हम जैसे ही फाइल को ट्रांसफर करेंगे वह छोटे-छोटे डेटा में बैठ जाएगी। जिसे हम डेटा पैकेट्स कहते हैं। उसके बाद यह पैकेट वायर से होते हुए destenatio कंप्यूटर तक पहुंच जाएंगे। जहां हम उसे सेंड करना चाहते है। जब भी हम किसी एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में कोई फाइल को ट्रांसफर करते हैं तो उनके बीच में protocol follow होता है। इसी प्रोटोकॉल की सहायता से हम डाटा को जहां भेजना चाहते वह वहीं जाता है।

Protocol का इतिहास -

सर्वप्रथम प्रोटोकॉल का Concept Advanced Research Project Agency द्वारा पहली बार Standerized protocol का Concept रखा गया था।जो कि उस समय (ARPA) Advanced Research Project Agency अमेरिका का Defence program का हिस्सा थी। (ARPA द्वारा नेटवर्क प्रोटोकॉल का Concept बनाया गया था। अमेरिका University तथा lab में बहुत सारे कंप्यूटर को एक साथ जोड़ने का काम ARPA द्वारा ही किया जाता है।

Protocol की आवश्यकता क्यों है। -

बिना प्रोटोकॉल के इंटरनेट किसी काम का नहीं होता है। प्रोटोकॉल के बिना कोई भी डिवाइस पूरे नेटवर्क पर एक दूसरे के द्वारा भेजे गए इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को समझने में असमर्थ होती है। इन नेटवर्क प्रोटोकॉल का कार्य इन डिवाइस के मध्य संपर्क स्थापित करना होता है। उदाहरण के लिए अगर आप अपने दोस्त को ई-मेल भेज रहे हैं तो क्या गारंटी है कि वह   ई-मेल आपके दोस्तों को ही मिलेगा। बिना प्रोटोकॉल कि वह किसी दूसरे व्यक्ति के पास भी जा सकता है। अगर आप अपने दोस्त को इमेज, वीडियो या कोई डॉक्यूमेंट ट्रांसफर कर रहे हैं और यह इमेज, वीडियो, डॉक्यूमेंट आपके दोस्तों को ही मिल रहा है तो यह प्रोटोकॉल के कारण ही उस तक पहुंच पाया है। क्योंकि आप जब भी किसी वस्तु को सेंड करते हैं तो उसके पीछे बहुत सारे प्रोटोकॉल नियम होते हैं। जो उस वस्तु को सही व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद करती है।

अगर प्रोटोकॉल नहीं होता तो आपके द्वारा से सेंड की गई वस्तु किसी दूसरे व्यक्ति को भी जा सकती थी।
प्रोटोकॉल द्वारा यह तय किया जाता है कि सभी प्रोग्राम एक ही फॉर्मेट में ही लिखे गए हैं। अगर इसे हम अलग-अलग लिखते हैं तो यह प्रोग्राम किसी अन्य के साथ बातचीत करने में असमर्थ होंगे।

जब किसी डिवाइस तक डेटा भेजा जाता है तो उसे कैसे receive करना है और किस तरह से response देना है यह सब प्रोटोकॉल के द्वारा बनाए गए rules पर ही निर्भर करता है।
 अगर कुल मिलाकर कहा जाए तो प्रोटोकॉल के बिना इंटरनेट का कोई मतलब नहीं है।

Conclusion -

आज इस पोस्ट में हमने आपको Protocol क्या है तथा ये कितने प्रकार के होते  है। इसके बारे में आपको पूरी जानकारी दी है। में आशा करता हु की आप लोगो को Protocol क्या है। इसके बारे में अच्छे से समझ आया होगा। अगर यदि आपको अभी भी इस पोस्ट को लेकर कुछ डाउट्स है या आप हमारी इस पोस्ट से असंतुष्ट है। या फिर हमारी इस पोस्ट में कुछ सुधार करने की जरूरत है या इस पोस्ट से जुड़ा कोई भी सवाल आपके मन मे है तो आप हमे नीचे comments करके जरूर बताये।

ओर यदि आपको हमारी पोस्ट Protocol क्या है। हिंदी में अच्छी लगी हो ओर आपको इससे कुछ सीखने का मिला हो तो हमे comments करके आप जरूर बताए।ओर इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ whatsapp group , facebook ओर अन्य social networks पर शेयर करे और इस जानकारी को अन्य लोगो तक पहुचाने में हमारी मदद करे।

 अभी के लिए बस इतना ही। हमारी इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। आपका दिन शुभ हो।













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